आसोज शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, शनिवार को जसोल के श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह मंगला आरती से ही हजारों श्रद्धालु कतार में लगकर राजराजेश्वरी श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी और श्री काला-गौरा भैरूजी के दर्शन करने पहुंचे। मंदिर परिसर भक्ति और उत्साह से भरा रहा। स्थानीय और हड़वा (बाड़मेर) से आए मांगणियार लोक कलाकारों ने मधुर भजनों से श्री राणीसा भटियाणीसा की महिमा का गुणगान किया। भजनों की धुन और 'मां जसोल' के जयकारों से पूरा मंदिर गूंज उठा। त्रयोदशी पर श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए संस्थान ने दर्शन, सुरक्षा, पार्किंग, पानी और साफ-सफाई के खास इंतजाम किए। भक्तों के लिए जिगजैग कतार प्रणाली और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम की व्यवस्था की गई। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में छायादार टेंट, गर्मी से राहत के लिए मिस्टिंग सिस्टम, शुद्ध पेयजल एवं विश्राम स्थलों की समुचित व्यवस्था की गई। प्रसाद अर्पण करने के लिए निर्धारित स्थानों पर सुव्यवस्थित प्रबंध किए गए तथा प्रसाद टोकन प्रणाली के माध्यम से प्रक्रिया को सरल एवं सुविधाजनक बनाया गया। जूता स्टैंड पर नंबरिंग सिस्टम की व्यवस्था से श्रद्धालुओं को अपने जूते-चप्पल सुरक्षित रखने एवं वापस प्राप्त करने में सुविधा मिली। मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन-प्रसादी वितरण की व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित रही। इसके अलावा वृद्धजनों एवं छोटे बच्चों के साथ आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष दर्शन मार्ग की व्यवस्था उपलब्ध रही, जिससे उन्हें सुगमता से दर्शन लाभ प्राप्त हुआ। संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग में श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग के लिए विशेष एवं सुव्यवस्थित प्रबंध किए गए। बड़ी संख्या में आने वाले वाहनों के सुचारु आवागमन के लिए वन-वे यातायात प्रणाली के साथ निर्धारित पार्किंग स्थलों पर वाहनों को व्यवस्थित रूप से खड़ा करवाने की व्यवस्था की गई। पार्किंग स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराया गया। विशेष रूप से वृद्धजनों एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की सुलभता तथा गोल्फ कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें पार्किंग स्थल से मंदिर परिसर तक पहुँचने में सुविधा मिली। रिवर फ्रंट पार्किंग में श्रद्धालुओं की सुविधार्थ निःशुल्क भोजन-प्रसादी की भी उत्तम व्यवस्था की गई, जिससे दर्शनार्थियों को भोजन-प्रसादी का लाभ प्राप्त हुआ। पार्किंग स्थल से लेकर मंदिर परिसर तक विभिन्न व्यवस्थाओं का समन्वय बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए संस्थान द्वारा समय-समय पर व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार एवं नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में छप्पन भोग एवं भोजन-प्रसादी भोग अर्पण की व्यवस्था में सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है। पूर्व में लाभार्थी परिवार स्वयं मंदिरों के अंदर प्रवेश कर अपने हाथों से छप्पन भोग एवं भोजन-प्रसादी भोग अर्पित करते थे। संशोधित व्यवस्था के अंतर्गत अब लाभार्थी परिवार मंदिरों के बाहर निर्धारित स्थान पर पुजारियों को भोग सौंप रहे हैं। इसके पश्चात पुजारी भोग को मंदिरों के अंदर ले जाकर धार्मिक परंपराओं एवं विधि-विधान के अनुरूप अर्पित कर रहे हैं। भोग अर्पण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पुजारी प्रसाद पुनः मंदिरों के बाहर उपस्थित लाभार्थी परिवारों को सौंप रहे हैं। इस दौरान लाभार्थी परिवार मंदिरों के बाहर से ही श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला-गौरा भैरूजी के दर्शन लाभ प्राप्त कर रहे हैं। संस्थान द्वारा मंदिरों की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस संशोधित व्यवस्था को आगामी सभी अवसरों पर प्रभावी रखने का निर्णय लिया गया है। साथ ही समस्त लाभार्थी परिवारों एवं श्रद्धालुओं से नई व्यवस्था का पूर्ण रूप से पालन करते हुए सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं की गरिमा, मंदिरों की सुरक्षा एवं भोग अर्पण की व्यवस्था सुचारु बनी रहे। त्रयोदशी के पावन अवसर पर जसोल धाम में श्रद्धालु भक्तों के लिए आयोजित निशुल्क भोजन प्रसादी (अन्नपूर्णा प्रसादम्) के पुण्य लाभार्थी आकाश बोथरा, पुत्र स्वर्गीय मांगीलाल बोथरा, मूल निवासी सुजानगढ़ (राजस्थान), हाल निवासी गुलाबबाग, जिला पूर्णिया (बिहार) रहे। इस पुण्य सेवा के लिए संस्थान द्वारा लाभार्थी परिवार के प्रति हार्दिक आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए जगत जननी श्री राणीसा भटियाणीसा के श्रीचरणों में समस्त परिवार के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की मंगलकामना की गई। त्रयोदशी के पावन अवसर पर आज सायं 7:30 बजे आयोजित होने वाली आरती का सीधा प्रसारण किया जाएगा। इसके माध्यम से देश-विदेश में निवासरत मां जसोल के श्रद्धालु भक्त अपने-अपने स्थानों से आरती के दर्शन लाभ प्राप्त कर सकेंगे। सायंकालीन आरती के दौरान माँ जसोल की दिव्य आराधना, दीपों की अलौकिक आभा एवं भक्तिमय वातावरण का सीधा प्रसारण श्रद्धालुओं को जसोल धाम की आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ेगा। विश्वभर में निवासरत श्रद्धालु भक्त इस प्रसारण के माध्यम से माँ के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकेंगे। संस्थान द्वारा समस्त श्रद्धालु भक्तों से सायंकालीन आरती में सम्मिलित होकर दर्शन लाभ प्राप्त करने तथा देश-विदेश में निवासरत श्रद्धालुओं से सीधे प्रसारण के माध्यम से जुड़ने का आग्रह किया गया है। साथ ही मंदिर परिसर में दर्शन, प्रसाद अर्पण, भोजन-प्रसादी एवं पार्किंग की निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करते हुए सहयोग प्रदान करने की अपील की गई है।