जोधपुर जिले की 12 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। राज्य सरकार ने खरीफ फसल वर्ष 2026 में कम बारिश, सतही और भू-जल की उपलब्धता में गिरावट और फसलों की स्थिति के आकलन के आधार पर घोषित किया। सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत राहत से जुड़े प्रावधान अगले 6 महीने तक प्रभावी रहेंगे। इस फैसले से सूखे की स्थिति से प्रभावित क्षेत्रों में राहत संबंधी व्यवस्थाएं लागू करने का रास्ता साफ हुआ है। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचनाओं के तहत ओसियां, तिंवरी, बालेसर, बावड़ी, शेरगढ़, सेखाला, पीपाड़ शहर, कुड़ी भगतासनी, जोधपुर, झंवर, बिलाड़ा और लूणी तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। शेष कुछ तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। राहत के प्रावधान छह महीने तक रहेंगे प्रभावी अधिसूचनाओं के अनुसार- अधिनियम की धारा 5 से 10 तक के राहत संबंधी प्रावधान अधिसूचना जारी होने की तिथि से 6 महीने तक प्रभावी रहेंगे। प्रभावित क्षेत्रों में संबंधित प्रावधानों के तहत पात्रता एवं नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जा सकेगी। राहत कार्यों की प्रभावी क्रियान्विति और निगरानी के निर्देश जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने संबंधित क्षेत्रों के तहसीलदारों एवं संबंधित अधिकारियों को को निर्देश दिए हैं कि सूखाग्रस्त घोषित तहसीलों में शीघ्र ही स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन कर राहत और सहायता संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। उन्होंने राजस्व, कृषि, पशुपालन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी और अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में कृषि, पेयजल, चारा डिपो, पशु शिविर, फसल मुआवजा एवं पशुधन से जुड़ी आवश्यकताओं की नियमित समीक्षा करने और पात्र लाभार्थियों तक नियमानुसार सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को फसल खराबे की स्थिति का आकलन, उपलब्ध आंकड़ों का सत्यापन तथा पात्र किसानों की पहचान कर लागू योजनाओं के तहत सहायता संबंधी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की निगरानी, चारा डिपो, पशु शिविर, फसल मुआवजा, पशुओं के लिए पेयजल एवं पशु चिकित्सा सेवाओं से संबंधित आवश्यकताओं की समीक्षा कर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। किसानों और ग्रामीण परिवारों को राहत प्रावधानों के लाभ सूखे की स्थिति का प्रभाव कृषि उत्पादन के साथ-साथ पशुधन, पशुओं के चारे की उपलब्धता, पेयजल व्यवस्था एवं ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ता है। अधिसूचना के तहत लागू प्रावधानों के अनुसार, भू-राजस्व वसूली के स्थगन, ऋण स्थगन तथा अन्य निर्धारित राहत उपायों का लाभ पात्रता एवं नियमानुसार दिया जा सकेगा। संबंधित विभागों द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान कर उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाएगा, ताकि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों, पशुपालकों एवं ग्रामीण परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।