त्याग, संयम और आत्मशुद्धि का पर्व पर्युषण जिलेभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। श्री जैन श्वेतांबर संघ के आठ दिवसीय पर्युषण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को ज्ञान की पूजा और कर्मों के फल की आराधना की गई। सुबह से ही शहर के जिनालयों में धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया। अभिजीत मुहूर्त में लाभार्थी रूपलाल रतनलाल मेहता परिवार के सान्निध्य में गाजे-बाजे के साथ कल्पसूत्र को मंदिर परिसर से पुण्य प्रवचन हॉल तक ले जाया गया। सकल संघ के श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते हुए इसमें शामिल हुए। साध्वी निर्मल गुणा श्रीजी के सान्निध्य में विधि-विधान से कल्पसूत्र स्थापित किया गया। ज्ञान पूजा के लाभार्थियों ने भी पूजा-अर्चना की। वहीं, जैन सोसायटी स्थित संभव नाथ उपाश्रय में पन्यास प्रवर भक्तिचंद्र विजय के सान्निध्य में लाभार्थी परिवार ने शास्त्र वोहराया और कल्पसूत्र का वाचन शुरू हुआ। साधु भगवंतों ने कल्पसूत्र व ज्ञान की महिमा बताते हुए कहा कि मनुष्य को किसी भी चीज का अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि कर्मों का फल हर व्यक्ति को भुगतना पड़ता है। पर्युषण संयम और साधना का पर्व है और कल्पसूत्र में तीर्थंकरों का जीवन दर्शन निहित है, जो त्याग और आदर्श की प्रेरणा देता है। शनिवार को कल्पसूत्र वाचन के बाद भगवान महावीर के जन्म वाचन का आयोजन धूमधाम से किया जाएगा। इस दौरान भगवान के जन्म से जुड़े स्वप्नों का धार्मिक विधान भी किया जाएगा। शहर के माणक चौक स्थित आदिनाथ मंदिर, घाटी स्थित पार्श्वनाथ मंदिर, महावीर स्वामी मंदिर, फौज का बड़ला स्थित शांतिनाथ मंदिर, ओटा स्थित नेमिनाथ मंदिर और जैन सोसायटी स्थित संभव नाथ जिनालय में प्रक्षाल, केसर पूजा, फूल पूजा और चैत्य वंदन के आयोजन हुए। भोर और रात में प्रतिक्रमण का क्रम भी जारी रहा। इससे पूर्व गुरुवार रात रातीजगा हुआ। भक्ति संध्या में धर्मप्रेमियों ने प्रभु भक्ति के गीतों पर भक्ति का रंग जमाया।