मेवात इलाके के कामां में पुलिस ने फिल्मी अंदाज में पीछा करते हुए एक ऐसे खतरनाक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो 'फर्जी पुलिस' बनकर अपहरण और अवैध वसूली के धंधे को अंजाम दे रहा था। पुलिस की गाड़ी को टक्कर मारकर की फायरिंग, 3 पकड़े जिला स्पेशल टीम (DST) ने विरार रोड से लेकर लोहसर तक करीब 5 किलोमीटर तक बदमाशों का पीछा किया। इस दौरान बदमाशों ने पुलिस की गाड़ी को टक्कर मारकर और फायरिंग कर भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क जवानों ने घेराबंदी कर गैंग के 6 में से 3 सदस्यों को दबोच लिया। अपहृत युवकों की सुरक्षित रिहाई पुलिस की इस कार्रवाई में सबसे बड़ी कामयाबी झेझपुरी निवासी दो युवकों की सुरक्षित रिहाई रही। बदमाशों ने इन दोनों का अपहरण कर लिया था और इन्हें ठिकाने लगाने या फिरौती वसूलने की फिराक में थे। पुलिस अब इन युवकों से पूछताछ कर गैंग के पुराने कारनामों की जानकारी जुटा रही है। फर्जी वर्दी से लेकर 'पोना' बंदूक तक बरामद गिरफ्तार आरोपियों के पास से बरामद सामान देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। इनके पास से मिला सामान किसी असली पुलिस टीम जैसा ही था। आरोपियों से एक 315 बोर डबल बैरल पोना, एक 12 बोर पोना और 6 जिंदा कारतूस, दिल्ली पुलिस का लोगो लगी वर्दी, नीली बत्ती, सायरन और पुलिस स्टिकर वाली गाड़ी बरामद हुई है। फ्रॉड लोगों को बनाते थे निशाना शुरुआती जांच में इस गैंग के तार हरियाणा और अन्य राज्यों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। यह गैंग बेहद शातिर तरीके से काम करता था। गैंग सबसे पहले उन लोगों को चिह्नित करता था जो खुद साइबर ठगी (OLX या अन्य फ्रॉड) के कामों में लिप्त थे।आरोपियों को पता था कि ठगी करने वाले लोग पुलिस के नाम से डरते हैं। ये फर्जी पुलिसकर्मी बनकर सीधे उनके गांवों में दबिश देते थे। वसूली का खेल गिरफ्तारी का डर दिखाकर ये लोगों को अपनी गाड़ी में उठा लेते थे और फिर जेल भेजने की धमकी देकर उनके परिजनों से मोटी रकम वसूलते थे। ये रहे पुलिस के जांबाज इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने में जिला स्पेशल टीम के प्रभारी वीरेंद्र सिंह, प्रेमचंद शर्मा, शशि कपिल, ड्राइवर लक्ष्मण सिंह और मुस्तकीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का अगला कदम भागे हुए तीन अन्य आरोपियों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस अब आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्थानीय स्तर पर उन्हें सूचनाएं कौन दे रहा था।