पंचायती राज चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। बीकानेर में इस बार का पंचायती राज चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। इस बार बड़े पैमाने पर ग्रामीण सरकार की कमान महिलाओं के हाथों में होगी। जिला परिषद से लेकर पंचायत समितियों के स्तर तक महिलाओं की मजबूत राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व की एक नई इबारत लिखी जाने वाली है। बीकानेर जिला परिषद के अब तक के लोकतांत्रिक इतिहास पर नजर डालें तो महिला नेतृत्व की एक अलग ही परंपरा रही है। पंचायती राज व्यवस्था के जानकारों के अनुसार इस बार पांचवीं बार जिला प्रमुख का पद एक बार फिर किसी महिला के खाते जाएगा। बीकानेर में पहली महिला जिला प्रमुख बनने का खिताब 1980 में स्व. कांता खतूरिया को प्राप्त हुआ था। उनका यह राजनीतिक कद इतना मजबूत था कि वे अपने पहले कार्यकाल (1980-1985) के बाद दूसरी बार (1985-1987) भी जिला प्रमुख के पद पर चुनी गईं। यदि खतूरिया के दोनों कार्यकाल को अलग-अलग गिना जाए तो यह पांचवां मौका होगा जब कोई महिला इस पद को सुशोभित करेगी वहीं यदि उनके दोनों कार्यकालों को एक माना जाए तो यह चौथा अवसर होगा। इसके अलावा सुनीता तर्ड, सुशीला सींवर भी एक-एक बार जिला प्रमुख रह चुकी हैं। वहीं, 15 में से 7 पंचायत समितियों की कमान भी महिलाओं के हाथ रहेगी। महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर पंचायत समितियों और जिला परिषद के आरक्षण आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण विकास की धुरी अब तेजी से महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि जब कुल पंचायत समितियों में से लगभग आधी सीटों पर महिला प्रधान और शीर्ष पर महिला जिला प्रमुख होंगी तो ग्रामीण योजनाओं के क्रियान्वयन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दों पर महिलाओं का दृष्टिकोण नीतिगत फैसलों में अधिक मुखर होकर सामने आएगा। आरक्षण की यह तस्वीर न केवल राजनीतिक दलों पर महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारने का दबाव बनाएगी बल्कि ग्रामीण इलाकों में जमीनी स्तर पर नेतृत्व कर रही महिलाओं के आत्मविश्वास को भी पंख देगी। सरपंचों से लेकर प्रधान और जिला प्रमुख तक की यह लंबी श्रृंखला ग्रामीण राजस्थान की सामाजिक और राजनीतिक चेतना में एक दूरगामी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। 15 पंचायत समितियों में आधी आबादी का सशक्त राजनीतिक दखल पंचायत समितियों में भी इस बार महिलाओं का बोलबाला रहने वाला है। जिले की 15 पंचायत समितियों में संपन्न हुई आरक्षण लॉटरी के अनुसार प्रधान पदों में से 7 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। जिले की इन 15 पंचायत समितियों में प्रधान के कुल पदों का सामाजिक समीकरण देखें तो कुल 4 पद अनुसूचित जाति, 3 पद अन्य पिछड़ा वर्ग और 8 पद सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं। इनमें से अनुसूचित जाति महिला के लिए बज्जू खालसा और हदां पंचायत समिति। अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए पूगल पंचायत समिति और सामान्य वर्ग (महिला) के लिए श्रीडूंगरगढ़, लूणकरणसर, जसरासर और बीठनोक पंचायत समितियां आरक्षित हैं। महिलाओं को उनका हक मिल रहा है देश में आधी आबादी महिलाओं की है। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। घर-परिवार से बाहर खेती-बाड़ी में भी समझ रखती हैं। राजनीतिक प्रतिनिधित्व उनका हक था जो अब मिल रहा है। वो तस्वीर बहुत सुखद होगी जब ​िजले में जिला प्रमुख से लेकर 7 प्रधानों की टोली महिलाओं की होगी। कांता खतूरिया, सुनीता तर्ड हो या मैं खुद। मैंने भी जिले की ज्यादातर पंचायतों में विकास करने का प्रयास किया। मुझे उम्मीद है आने वाली महिलाओं की टीम भी जिले के ग्रामीण विकास को तवज्जो देंगी। सुशीला सींवर, पूर्व जिला प्रमुख बीकानेर