कोटा के जेके लोन हॉस्पिटल को राजस्थान सरकार ने 27 नवंबर को सम्मानित किया है। अस्पताल को प्रसूताओं और नवजातों की ‘बेस्ट मॉनिटरिंग’ का एप्रिसिएशन अवॉर्ड दिया गया है। वहीं डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से महिलाओं की लगातार मौतें हो रही हैं। अस्पताल में 5 महीने में 4 महिलाएं दम तोड़ चुकी हैं। हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया- हॉस्पिटल ने 92 प्रतिशत नंबर के साथ अवॉर्ड हासिल किया है। लेबर रूम, मैटरनल ओटी आदि के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस के अनुसार काम करने पर नंबर मिले हैं। हॉस्पिटल अधीक्षक बोलीं- मोर्टेलिटी रेट काफी कम डॉ. निर्मला शर्मा का कहना है कि अस्पताल की मैटरनल मोर्टेलिटी रेट (मृत्यु दर) काफी कम आ रही है। साथ ही हॉस्पिटल को बारां, बूंदी, झालावाड़ और कोटा क्षेत्र के अन्य अस्पतालों की मॉनिटरिंग व मेंटरशिप की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके तहत वे अन्य अस्पतालों को जटिल केस संभालने और गाइड करने का काम करते हैं।अच्छी मेंटरशिप के लिए राज्य सरकार ने अस्पताल को यह सम्मान दिया है। अवॉर्ड के बीच हो रही मौतें हालांकि, जमीनी हकीकत अधीक्षक के इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। हॉस्पिटल में पछले 5 महीने में 4 महिलाओं की मौत किडनी फेलियर की वजह से हो चुकी है। मई 2026 में सिजेरियन प्रसव के बाद 9 से अधिक महिलाओं के किडनी फेल होने के मामले सामने आए। एक दो मौत रोज हो रही हैं। अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि अस्पताल में रेफरल केस ज्यादा आते हैं जो कि बहुत गंभीर होते हैं। कई बार उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है। हमारी कोशिश ज्यादा से ज्यादा मरीजों को बचाने की ही होती है। तीन दिन पहले ही हुई महिला की मौत तीन दिन पहले (25 अक्टूबर) ही अस्पताल में शबनम बानो की मौत हो गई थी। शुक्रवार (23 अक्टूबर) को छबड़ा (बारां) निवासी शबनम बानो (26) का ऑपरेशन हुआ था। ड्रिप चढ़ाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी थी। डिलीवरी के बाद उसका ब्लड प्रेशर लो (कम) हो गया था। शनिवार रात 10 बजे शबनम ने दम तोड़ दिया था। इससे पहले 11 मई को पिंकी महावर, 9 मई को प्रिया महावर और 10 अगस्त को गंगोत्री सैनी की मौत किडनी फेल होने से हो चुकी है।