आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं के संचालन और परिणाम जारी करने में देरी अब भारी पड़ सकती है। नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय पर परीक्षाएं आयोजित नहीं करने, परिणाम घोषित करने और प्रश्नपत्रों का निर्धारण व ब्लूप्रिंट तैयार करने में लापरवाही बरतने पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। मानकों का पर्याप्त पालन नहीं होने पर संबंधित संस्थान की चिकित्सा योग्यता की मान्यता वापस लेने तक की कार्रवाई संभव है। एनसीआईएसएम के बोर्ड ऑफ आयुर्वेद के अध्यक्ष डॉ. अल्लमप्रभु गुड्डा ने 22 अक्टूबर को देशभर के स्वास्थ्य सचिवों, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार तथा इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ संस्थानों के निदेशकों और प्राचार्यों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें समयबद्ध शैक्षणिक गतिविधियों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग को अलग-अलग स्थानों से इस संबंध में शिकायतें भी मिली हैं। मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड संबंधित विश्वविद्यालयों और संस्थानों का बिना पूर्व सूचना निरीक्षण कर उनके निर्धारित मानकों और मापदंडों का मूल्यांकन कर सकता है। आयोग ने शैक्षणिक कैलेंडर और जरूरी सूचनाएं विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने तथा एमएसई-2022 रेगुलेशंस का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। छात्रों को होने वाली असुविधा के लिए विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों को उत्तरदायी माना जाएगा। आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने बताया कि देशभर में शैक्षणिक गतिविधियों में एकरूपता सुनिश्चित करने वाला आयोग का कदम सराहनीय है। परीक्षाओं और परिणामों में देरी से चिकित्सा विद्यार्थियों की इंटर्नशिप, जॉब और पीजी परीक्षाएं प्रभावित होती हैं। इंटर्नशिप व पीजी परीक्षा पर असर परीक्षाओं और परिणामों में देरी से चिकित्सा विद्यार्थियों की इंटर्नशिप, हाउस जॉब और स्नातकोत्तर (पीजी) परीक्षाएं प्रभावित होती हैं। एनसीआईएसएम वर्ष 2021-22 बैच से शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर रहा है। मगर अधिकांश जगह इसकी पालना नहीं हो रही है। वहीं एकरूपता नहीं आ पा रही है। नए निर्देशों से विश्वविद्यालयों में कैलेंडर के अनुसार काम होने की संभावना है। देशभर में सरकारी और निजी मिलाकर 700 से अधिक आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा कॉलेज संचालित हैं, जिनमें दो लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।