राजस्व मंत्री हेमंत मीणा द्वारा दिए गए एक हालिया इंटरव्यू में संपत्ति और आय को लेकर उठाए गए सवालों पर राजनीति गर्मा गई है। पूर्व विधायक रामलाल मीणा ने पलटवार करते हुए मंत्री के आरोपों को सिरे से खारिज किया है और अपनी संपत्ति का पूरा हिसाब सार्वजनिक जांच के लिए पेश करने का दावा किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति चाय बेचकर देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो दूध बेचने वाला विधायक क्यों नहीं बन सकता? दूसरी ओर, पंचायती राज और जिला परिषद चुनावों की सरगर्मी के बीच धरियावद से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायक थावरचंद डामोर ने भी सत्तारूढ़ दल और विपक्ष पर निशाना साधते हुए जनहित के मुद्दों से भटकने का आरोप लगाया है। पूर्व विधायक रामलाल मीणा ने राजस्व मंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके मकान के निर्माण में इस्तेमाल हुई सीमेंट, सरिया और रेत के एक-एक रुपए का जीएसटी बिल और रॉयल्टी का रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि गिट्टी उनके अपने क्रेशर से आई थी और परिवहन के साधन भी निजी थे। उन्होंने अपनी संपत्ति का निर्माण एक नंबर की कमाई और इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) के आधार पर होना बताया। रामलाल मीणा ने मंत्री हेमंत मीणा पर उल्टा हमला बोलते हुए पूछा कि जयपुर के सड़ला थाना स्थित शर्मा कॉलोनी के पास 500 करोड़ रुपए के प्लॉट, बहुमंजिला इमारतों, होटलों, पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों का हिसाब किसके पास है? उन्होंने सवाल किया कि अंबा माता से सुमित्रा सर्कल तक की जमीनों और जयपुर-उदयपुर के बंगलों का ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता। दक्षिण राजस्थान (प्रतापगढ़-धरियावद क्षेत्र) की राजनीति में लंबे समय से स्थानीय नेताओं के बीच संपत्ति और प्रभाव को लेकर खींचतान चलती रही है। हेमंत मीणा और रामलाल मीणा के बीच का यह वाकयुद्ध केवल व्यक्तिगत संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी स्थानीय चुनावों में अपने-अपने वोट बैंक को साधने की रणनीति भी है। आदिवासी बहुल इलाकों में बीएपी के उभार ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के परंपरागत गणित को बिगाड़ दिया है, इससे आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव लड़ते समय हर उम्मीदवार को फॉर्म 26 में अपनी और अपने आश्रितों की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देना अनिवार्य होता है। जनप्रतिनिधि अपनी आय का वार्षिक रिटर्न दाखिल करते हैं। यदि घोषित आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है, तो आयकर विभाग या लोकपाल/लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ध्रुवीकरण छोड़ काम की बात करें सरकार: डामोर स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के बीच धरियावद से बीएपी विधायक थावरचंद डामोर ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर तीखा हमला बोला है। डामोर ने कहा कि डबल इंजन की सरकार गांवों के विकास और काम की बात करने के बजाय केवल हिंदू-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान और भावनात्मक मुद्दों पर राजनीति कर रही है। बीएपी विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन में बैठे कुछ लोग सत्ता पक्ष की चापलूसी कर रहे हैं। उन्होंने वंचितों, गरीबों और आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।