भारत-पाकिस्तान के श्रीगंगानगर बॉर्डर पर 12 अक्टूबर को पाक ड्रोन से आरडीएक्स और हथियारों की ड्रॉपिंग के मामले में नया खुलासा हुआ है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे सप्लायर अली चाचा से डील करने वाला हैंडलर कुलवंत सिंह सिर्फ 20 साल का है और 10वीं तक ही पढ़ा है। इतनी कम उम्र में ही पेशेवर अपराधी बन गया है। उस पर पंजाब के 8 थानों में 10 केस दर्ज हैं। ये केस 2 साल में दर्ज हुए हैं। पहला केस 23 अप्रैल 2024 को दर्ज हुआ और दसवां इसी साल 29 मार्च को। कुलवंत इसी साल 27 अगस्त को बठिंडा सेंट्रल जेल से बाहर आया था। जेल से छूटने के 45 दिन में उसने पाकिस्तानी सप्लायर से आरडीएक्स और हथियारों की डील कर ली और 12 अक्टूबर को श्रीगंगानगर बॉर्डर पर ड्रॉपिंग भी हो गई। कुलवंत, पंजाब के जलालाबाद सिटी थाने में 12 सितंबर की रात हुए ग्रेनेड हमले के वांटेड सुखविंदर से पहले से परिचित है। श्रीगंगानगर में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के मुखबिर रघु के संपर्क में आने के बाद सुखविंदर को जैसे ही मोबाइल मिला, उसने कुलवंत से डील की बातचीत शुरू कर दी। मामले में किसकी क्या भूमिका थी, इसका पता लगाने के लिए एटीएस ने जांच तेज कर दी है। मुख्यालय से डीआईजी राममूर्ति जोशी के अलावा तीन अधिकारी श्रीगंगानगर में डेरा डाले हुए हैं। बीकानेर यूनिट तो पहले से वहीं है ही। एजेंसी पुलिस की मदद से दबिश दे रही है। इलाके का नामी तस्कर, एनडीपीएस के 7 मुकदमे कुलवंत पंजाब के फिरोजपुर जिले के अलीका गांव का रहने वाला है, लेकिन उसका तस्करी का नेटवर्क मोगा, फाजिल्का और फरीदकोट जिलों तक फैला है। उस पर इन जिलों में एनडीपीएस एक्ट के 7 मुकदमे दर्ज हैं। रिकॉर्ड के अनुसार कुलवंत 2 साल 4 महीने जेल में भी रह चुका है। वह 26 अप्रैल 2024 को पहली बार मोगा सब-जेल में बंद हुआ था। 4 मई 2024 को उसे यहां से फरीदकोट सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया। 10 अगस्त 2026 को उसे बठिंडा सेंट्रल जेल भेजा गया। यहां से वह 27 अगस्त 2026 को बाहर आया। फरीदकोट सेंट्रल जेल में 3 बार मोबाइल बरामद हुआ जेल जाने के बाद भी कुलवंत का तस्करी का सिंडिकेट बंद नहीं हुआ। जेल से मोबाइल के जरिए ऑपरेट किया। फरीदकोट सेंट्रल जेल में 2 साल 3 महीने बंद रहा। इस दौरान उसके पास से 3 बार मोबाइल बरामद हुआ। जेल प्रशासन ने कुलवंत के खिलाफ फरीदकोट सिटी थाने में 3 मुकदमे दर्ज करवाए गए। बार-बार मोबाइल मिलने पर उसे बठिंडा सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया, जहां से वह जमानत मिलने के बाद रिहा हुआ। अब एटीएस और पंजाब पुलिस कुलवंत की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। पंजाब पुलिस भी एक्टिव, तलाश में दबिश दे रही इस केस में पंजाब पुलिस भी एक्टिव है। टीमें हैंडलर कुलवंत की तलाश में दबिश दे रही हैं। ड्रॉपिंग के दिन उसकी लोकेशन मोगा में थी। तब से ही वो ठिकाने बदल रहा है। वो पहले से ही शातिर तरीके से फरारी काटने का एक्सपर्ट माना जाता है। सुखविंदर और लखविंदर से बात करने के लिए भी उसने कई नंबरों का इस्तेमाल किया। सुखविंदर और लखविंदर अभी एटीएस की हिरासत में हैं। रिमांड पूरा होने के बाद जेल जाने पर पंजाब पुलिस सुखविंदर को रिमांड पर लेगी। वो जलालाबाद थाने पर हुए ग्रेनेड हमले के केस में आरोपी है। उस पर हमलावरों तक ग्रेनेड पहुंचाने का आरोप है। बड़ा सवाल- ड्रग्स तस्कर ने विस्फोटक क्यों मंगाया? क्राइम रिकॉर्ड के अनुसार कुलवंत ड्रग्स तस्कर है। उस पर एनडीपीएस एक्ट के 7 मुकदमे दर्ज हैं। एएनटीएफ का कहना है कि पाकिस्तानी ड्रोन से हेरोइन की ड्रॉपिंग ही होने वाली थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुलवंत ने इस बार आरडीएक्स क्यों मंगाया। जांच एजेंसियों को अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है। जांच में यह तो साफ हो गया है कि उसने हथियार और कारतूस अपने लिए मंगाए थे। कुलवंत के गिरफ्त में आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आरडीएक्स की डिलीवरी कहां होनी थी। वह इसका खुद ही इस्तेमाल करने वाला था या इसे किसी आतंकी संगठन के स्लीपर सेल को देने वाला था।