राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायती राज चुनावों से जुड़े एक अहम मामले में साफ किया है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद कोर्ट चुनावी प्रक्रिया में दखल नहीं देगी। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकल पीठ ने मनोज कुमार गोदारा व अन्य की याचिका खारिज की। याचिकाकर्ताओं ने बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायत मोतीनगरी के वार्ड नंबर 02 की मतदाता सूची से नाम हटाने के 15 अक्टूबर 2026 के प्रशासनिक आदेश को चुनौती दी। उनका तर्क था कि जिला कलेक्टर, बालोतरा का यह निर्णय गलत है और उनके पास पर्याप्त दस्तावेज हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि 03 अक्टूबर 2026 को पंचायती राज चुनावों का कार्यक्रम जारी हो चुका है। संविधान के अनुच्छेद 243-O के तहत कोर्ट को चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। आयोग ने कहा कि चुनाव शुरू होने के बाद मतदाता सूचियों में बदलाव से पूरा कार्यक्रम बिगड़ सकता है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एन.पी. पन्नुस्वामी और मोहिंदर सिंह गिल जैसे फैसलों का उदाहरण दिया। कोर्ट ने माना कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्यायपालिका को संयम बरतना चाहिए।