जालोर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने जोधपुर के वसुंधरा हॉस्पिटल और उसके तीन डॉक्टरों को मेडिकल लापरवाही का दोषी ठहराया है। आयोग के अध्यक्ष धनश्याम यादव और सदस्य निरंजन शर्मा की पीठ ने परिवादी को कुल 15 लाख 61 हजार 662 रुपए हर्जाना और इलाज का खर्च अदा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोकने के लिए अस्पताल पर 1.50 लाख रुपए का अतिरिक्त दंड भी लगाया गया है, जो राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा होगा। आयोग ने माना कि गॉल ब्लैडर के ऑपरेशन के बाद बिना किसी वाइटल मॉनिटरिंग के अत्यधिक सोडियम चढ़ाना मरीज की मौत का मुख्य कारण बना। पित्ताशय के ऑपरेशन के बाद बिगड़ी सायरा की हालत जालोर के किला घाटी, हब्शीयों का वास निवासी परिवादी जोयब खान पुत्र सरफराज खान ने आयोग को बताया कि उनकी माता सायरा बानू को पेट दर्द होने पर 25 मई 2022 को जोधपुर के वसुंधरा अस्पताल ले जाया गया था। वहां सर्जन डॉ. विनोद शैली ने गॉल ब्लैडर में पथरी बताकर 26 मई को ऑपरेशन शुरू किया। साढ़े चार घंटे चले इस ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने परिवादी को थिएटर में बुलाकर कहा कि गॉल ब्लैडर नहीं मिल रहा है। ऑपरेशन के बाद मरीज का पेट फूलने लगा। अस्पताल ने दलील दी कि आंतों के पास से सर्जरी होने के कारण उन्होंने काम करना बंद कर दिया है। हालत में सुधार न होने के बावजूद 3 जून 2022 को मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। बिना मॉनिटरिंग सोडियम ओवरडोज ने ली मरीज की जान डिस्चार्ज के बाद घर पर मरीज की सेहत और बिगड़ गई। 9 जून 2022 को उन्हें फिर से अस्पताल लाया गया, जहां जांच में सोडियम का स्तर बेहद कम (114.3 mmol/L) पाया गया। फिजीशियन डॉ. अनिल शर्मा ने बिना किसी वाइटल मॉनिटरिंग के सीधे 3 प्रतिशत सोडियम का इंजेक्शन 15 ML प्रति घंटे की दर से शुरू कर दिया और यह 11 जून की शाम तक लगातार दिया गया। इससे सोडियम का स्तर क्षमता से अधिक (160.07 mmol/L) बढ़ गया और सायरा बानू बेसुध हो गईं। 12 जून को न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद ने रिपोर्ट देखकर बताया कि बिना मॉनिटरिंग के अत्यधिक सोडियम चढ़ाने से ब्रेन डैमेज हुआ है। इसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन 14 जून 2022 को उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। आयोग: अस्पताल और तीनों डॉक्टर संयुक्त रूप से जिम्मेदार आयोग ने पाया कि अस्पताल के मालिक डॉ. संजय मकवाना, सर्जन डॉ. विनोद शैली और फिजीशियन डॉ. अनिल शर्मा का कृत्य स्पष्ट रूप से सेवादोष और उपेक्षापूर्ण कार्य की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच परम विश्वास का संबंध होता है और बिना मॉनिटरिंग के अत्यधिक सोडियम देना घोर लापरवाही है। अस्पताल ने तय समयावधि (45 दिन) में जवाब भी पेश नहीं किया था। आयोग ने आदेश दिया कि अस्पताल और तीनों डॉक्टर परिवादी को मानसिक कष्ट और क्षतिपूर्ति के 15 लाख रुपए, इलाज के 51 हजार 662 रुपए और परिवाद व्यय के 10 हजार रुपए (कुल 15,61,662 रुपए) 45 दिन के भीतर अदा करें। भुगतान न करने पर परिवाद दायर करने की तारीख 21 अक्टूबर 2022 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा, 1.50 लाख रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। --- ये खबर भी पढ़ें हॉस्पिटल में महिला की मौत;परिवार ने लगाए लापरवाही के आरोप:कहा- दो दिन से कह रहे जयपुर रेफर कर दो; किसी ने नहीं सुनी अलवर के जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से 50 साल की महिला की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया गया है। (पूरी खबर पढ़ें)