नमस्कार, पंचायत चुनाव में बानसूर (कोटपूतली) के एक कारोबारी की दिली तमन्ना 'किंगमेकर' बनने की है। पूर्व सीएम के पूर्व OSD दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से गर्मजोशी से मिले। बालोतरा में विधायकजी से जनता ने तीखे सवाल पूछ लिए और कोटा में कुर्सी की जंग मैदान तक आ गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. पंचायत चुनाव के बीच 'किंगमेकर' की चर्चा रहीमदास जी ने कहा था- बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न बोलें बोल। रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका मेरो मोल। अर्थात बड़े लोग खुद की बड़ाई नहीं करते। बड़ी बातें नहीं बोलते। हीरा कभी खुद नहीं कहता कि मेरी कीमत लाखों में है। वक्त बदल चुका है। हालात बदल चुके हैं। जज्बात बदल चुके हैं। अब हीरा खड़े होकर खुद कहता है कि लाख टका मेरो मोल। बानसूर (कोटपूतली) इलाके के एक कारोबारी हैं। नाम है मातादीन पणिहारी। मातादीन आजकल दान देने के स्टाइल के कारण चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर इनके वीडियो खूब घूम रहे हैं। हाल ही इन्होंने कहा- मातादीन से लाखों की बात मत करो। करोड़ों की करो। लाखों देने वाले तो कई बैठे हैं। मुझे बुलाओ तो करोड़ों मांगना। सभा-समाज हैरान। वे धार्मिक कार्यक्रम में भामाशाह की हैसियत से दान देने आए थे। लगे हाथ अपनी पीड़ा भी जाहिर की- मेरे बैंक खातों में भगवान की दया से खूब पैसा पड़ा है। टैक्स लग रहा है। हम संभाल नहीं पा रहे। सरकार छापे डाल रही है। उन्हें कुछ नहीं मिलता। 60-60 टीमें कार्रवाई करने आती हैं। विभाग के नीचे से ऊपर तक के अफसर, एसडीएम, तहसीलदार घूम-घाम कर अघा गए, उन्हें एसिडिटी हो गई। जिनकी जमीनें हम खरीद रहे हैं, वे 5 लाख मांगें तो हम 10 लाख देते हैं। जमींदार भी अघा गए। अब पैसा लगाऊं तो कहां लगाऊं? इतना पैसा देवता झेल सकते हैं, शिक्षा के मंदिर झेल सकते हैं या गोशालाएं झेल सकती हैं। इलाके के दवरा गांव में एक बालिका छात्रावास के लिए उन्होंने 12 करोड़ 51 लाख रुपए देने का ऐलान कर दिया। उनकी बातों से राजनीतिज्ञों में हलचल है। ये बंदा चुनाव में खड़ा हो गया तो क्या करेगा। मातादीन ने अभयदान देने के अंदाज में कहा- चिंता मत करो। मैं पर्चा भरने तक गांव में नहीं आऊंगा। चुनाव नहीं लडूंगा। जो काम मुझे चुनाव लड़ने के बाद करना है, वो अभी भी कर रहा हूं। चुनाव जीतने के बाद भी मैं सबकी इच्छाएं पूरी नहीं कर सकता। सबका सम्मान नहीं पा सकता। अगर कोई सरपंच-प्रधान बनने का इच्छुक हो तो मुझे बता देना। मैं गांव-समाज से बात करके निर्विरोध बनवा दूंगा। कोई निर्दलीय लड़ रहा हो तो बस्ती से सर्वसम्मति ले आना, मैं पैसा लगा दूंगा। पक्ष-विपक्ष किए बिना साथ दूंगा। कुल मिलाकर मातादीन पणिहार किंगमेकर बनने में रुचि दिखा रहे हैं। 2. पूर्व OSD की कांग्रेस नेताओं से मुलाकात वे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के OSD रहे। ओएसडी का मतलब ही ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी होता है। तो तत्कालीन मुख्यमंत्रीजी ने उनसे 'स्पेशल ड्यूटी' करा ली। ओएसडी का हाजमा ठीक होना चाहिए। उसे बातें पचानी आनी चाहिए। लेकिन ओएसडी साहब नहीं कर पाए। एक ऑडियो और पेन ड्राइव की बात उन्होंने जग-भर में फैला दी। अब पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर अच्छी बात थोड़े ही है। पूर्व सीएम पर तोहमतें लगाकर खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन ज्यादा कुछ हासिल नहीं कर सके। भरोसेमंद आदमी कहीं भी अपनी जगह बना लेता है, लेकिन एक बार भरोसा टूटा तो हर कोई कन्नी काटता है। न इधर से भाव मिला और न उधर से। हाल ही दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राजस्थान स्टेट गेस्ट हाउस में पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा कांग्रेस नेताओं से गर्मजोशी से मिलते दिखे। इनमें पुखराज पाराशर, पूर्व मंत्री रमेश मीणा, रामलाल जाट तो पूर्व सीएम के खास और करीबी हैं। अब इन तस्वीरों की काफी चर्चा हो रही है। राजनीतिक मतलब गढ़े जा रहे हैं। हर तरफ से एक सवाल को लेकर बड़ी काना-फूसी हो रही है- लोकेशजी को सियासी माफी मिल गई क्या? 3. विधायकजी की रील-अपील और सच बालोतरा के सिवाना से विधायकजी एक्टिव रहते हैं। जहां भी जाते हैं रील बनवाते हैं। फोटो सोशल मीडिया पर डलवाते हैं। जिला परिषद और पंच-सरपंच चुनाव को लेकर काफी एक्टिव दिखे। अच्छे-अच्छे वीडियो जुटाकर उनकी टीम ने ‘मजबूत इरादे जीतेंगे’ गाने पर बढ़िया रील बना दी। चुनाव के दिन से ठीक पहले उन्होंने जनता से अपील कर दी कि अगर गांव का विकास चाहिए और लोकतंत्र को अगर मजबूत करना है तो पार्टी के सभी उम्मीदवारों का समर्थन करो। माननीय जब आभासी दुनिया से बाहर निकले तो सच से सामना हो गया। एक गांव में वो चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे। वहां युवाओं ने घेर लिया। पीछे पड़ गए। बोले- आपने गांव के लिए क्या काम किया है, कोई तीन काम गिना दीजिए? विधायकजी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। इतने तीखे सवालों की उम्मीद नहीं थी। युवा जोश में थे। विधायकजी ने हंसकर बात टालनी चाही, लेकिन सामने वालों के तेवर दिख रहे थे। उन्होंने कहा- मैंने 3 हैंडपंप लगवाए। युवा ने कहा- हैंडपंप, जिनमें पानी नहीं आता। विधायकजी ने बेचारगी दिखाई- अब पानी नहीं आता तो मैं क्या करूं? मैंने तो भवन भी बनवाए। दूसरा युवक बोला- भवन? कौनसे भवन बनवाए? विधायकजी ने देख लिया कि युवक तैयारी के साथ आए हैं। वीडियो बना रहे हैं। बड़ी मुश्किल से युवाओं से पीछा छुड़ाया। 4. चलते-चलते... सारा झगड़ा कुर्सी का है। कुर्सी के लिए दिल्ली से लेकर गांव-गांव तक में हाहाकार मचा हुआ है। कोई वादे कर रहा है तो कोई आश्वासन दे रहा है। किसी का आक्रोश निकल रहा है तो कोई भविष्य की गुंजाइश देख रहा है। किसी को बैठे-बिठाए ताज मिल रहा है तो किसी को एड़ियां रगड़कर भी निराशा ही हाथ लग रही है। पंचायती राज के चुनाव चल रहे हैं। कुर्सी को लेकर झगड़ा फसाद तो होगा ही। लेकिन कोटा में वाकई कुर्सी युद्ध हो गया। कोटा में नगर निगम की ओर से मेला किया गया था। मेले में 'पंजाबी नाइट' कार्यक्रम चल रहा था। पंजाबी सिंगर जस्सी गिल का शो था। इस बीच मंच पर डांस करने को लेकर युवाओं के गुट भिड़ गए। बाद में सिंगर की परफॉर्मेंस एक तरफ चलती रही और कुर्सी का युद्ध मैदान में कुर्सियों से ही लड़ा जाने लगा। इनपुट सहयोग- नितिन शर्मा (कोटा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।