राजस्थान ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट और एक्सपो-2026 में राजस्थान को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए देश में तीसरा स्थान मिला है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राजस्थान को यह सम्मान दिया। राजस्थान की ओर से ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने सम्मान हासिल किया। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा- राज्य सरकार अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। वर्तमान में राजस्थान में 51.6 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 45 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है। इससे राजस्थान देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पीएम-कुसुम योजना में भी राजस्थान अव्वल ऊर्जा मंत्री ने बताया- राजस्थान अक्षय ऊर्जा उत्पादन, स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता और प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना में देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा- यह राष्ट्रीय सम्मान केवल ऊर्जा उत्पादन के आंकड़ों के आधार पर नहीं मिला है, बल्कि नीतिगत एवं नियामकीय व्यवस्था, ग्रिड की तैयारी, बिजली वितरण कंपनियों के प्रदर्शन और निवेश के अनुकूल माहौल सहित विभिन्न मानकों पर प्रदेश के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए मिला है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने भी राजस्थान के प्रयासों की सराहना की है। 2030 तक ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाने का लक्ष्य नागर ने कहा- राज्य सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक देश की 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देना है। इसके लिए सौर और पवन ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन और आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा- अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहा विस्तार प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, किसानों की आय बढ़ाने और राजस्थान को देश के प्रमुख ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।