टोंक समेत राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में अब आधार कार्ड नहीं होने के कारण किसी भी बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं रखा जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने इस संबंध में प्रदेश के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिया जाए। इस निर्णय से उन बच्चों और उनके अभिभावकों को राहत मिलेगी, जिनके पास किसी कारणवश अभी तक आधार कार्ड नहीं है या इसे बनवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज के अभाव में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बच्चे को विद्यालय में प्रवेश का अवसर मिले। इससे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जारी किए निर्देश कार्यालय निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। इसके तहत प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश राजस्थान सरकार के शिक्षा (ग्रुप-5) विभाग के 9 अक्टूबर 2026 के पत्र और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के 6 अप्रैल 2026 के पूर्व आदेश के संदर्भ में जारी किया गया है। इसमें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) से प्राप्त निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण किसी विद्यार्थी को प्रवेश से वंचित नहीं रखा जाए। सभी विद्यालयों के संस्था प्रधानों को पालना के निर्देश प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने आदेश की प्रति समस्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों एवं पदेन जिला परियोजना अधिकारियों, समग्र शिक्षा, जिला शिक्षा अधिकारियों (प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा), मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों, पीईईओ, यूसीईईओ और सभी विद्यालयों के संस्था प्रधानों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है। इसका उद्देश्य प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान एकरूपता सुनिश्चित करना है, ताकि आधार कार्ड नहीं होने के कारण किसी विद्यार्थी का दाखिला नहीं रोका जाए। संबंधित अधिकारियों को आदेश की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेज के अभाव में बाधित नहीं होगी पढ़ाई शिक्षा से जुड़ी औपचारिकताओं के कारण कई बार बच्चों और उनके अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं होने पर विद्यालय में प्रवेश को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है। शिक्षा विभाग के इस आदेश से स्पष्ट किया गया है कि आधार कार्ड का अभाव विद्यालय में प्रवेश से इनकार करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। इससे अधिकाधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और नामांकन बढ़ाने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है। शिक्षा से वंचित न रहे कोई भी बच्चा शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण किसी भी बच्चे को विद्यालय में प्रवेश से वंचित रखना उचित नहीं है। शिक्षा प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव है और दस्तावेजों के अभाव में किसी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। सलावद ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय का यह निर्णय सराहनीय है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और वंचित परिवारों के बच्चों को राहत मिलेगी। उन्होंने सभी संस्था प्रधानों और संबंधित अधिकारियों से आदेश की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने तथा आधार कार्ड नहीं होने के कारण किसी भी बच्चे का दाखिला नहीं रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े और कोई भी विद्यार्थी आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। इस निर्णय से सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ने की भी उम्मीद है।