वाणिज्यिक कर विभाग ने प्रदेशभर में कार्रवाई की। विभाग ने 13 और 14 अक्टूबर को किराना, निर्माण, मार्बल, हार्डवेयर और लुब्रिकेंट कारोबार से जुड़े 8 कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों पर सर्वे की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान विभिन्न मामलों में कुल 1 करोड़ 43 लाख 67 हजार रुपए से अधिक की राशि जमा कराने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिवर्स कराने पर कार्रवाई की गई। जांच में कारोबार छिपाने, बिक्री के अनुपात में कम टैक्स जमा कराने, गलत तरीके से ITC का लाभ लेने, टैक्स विवरणियों में अंतर और अनिवार्य ई-इनवॉइस जारी नहीं करने जैसी संभावित अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठानों के स्टॉक, खरीद-बिक्री के बिल और लेखा अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। जयपुर में 99.76 लाख रुपए की ITC रिवर्स जयपुर के सी-स्कीम स्थित मैसर्स एजीआरएस वेंचर्स एलएलपी के खिलाफ अचल संपत्ति निर्माण से संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट के उपयोग की जांच की गई। कार्रवाई के दौरान फर्म ने 99.76 लाख रुपए की ITC स्वेच्छा से रिवर्स की। अलवर: दो कारोबारियों से 24.70 लाख रुपए से अधिक जमा अलवर जिले के मालाखेड़ा स्थित मैसर्स नरेश जनरल स्टोर और संबंधित फर्मों के यहां स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। करीब 11 लाख रुपए की संभावित कर देयता मामले में करदाता ने 10.67 लाख रुपए स्वेच्छा से जमा कराए। वहीं, अलवर के मुंगस्का स्थित दिल्ली रोड पर मैसर्स भव्य लुब्रिकेंट्स के खिलाफ टर्नओवर छिपाने के संदेह में कार्रवाई की गई। फर्म ने 14 लाख 3 हजार 576 रुपए स्वेच्छा से जमा कराए। सीकर: निर्माण और हार्डवेयर फर्मों की जांच सीकर जिले के दांतारामगढ़ क्षेत्र स्थित मैसर्स पी.आर.के. कंस्ट्रक्शन कंपनी के मामले में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान करीब 19.90 लाख रुपए का अंतर सामने आया। विभाग रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत कर भुगतान, निर्धारित सीमा से अधिक ITC के दावे और पांच करोड़ रुपए से अधिक वार्षिक कारोबार के बावजूद अनिवार्य ई-इनवॉइस जारी नहीं करने जैसे बिंदुओं की जांच कर रहा है। रींगस स्थित मैसर्स शिव हार्डवेयर एंड जनरल स्टोर पर कारोबार और कर दरों से जुड़ी विसंगतियों के आधार पर सर्वे किया गया। इस मामले में करीब 10 लाख रुपए की संभावित कर अनियमितता का अनुमान है। विभाग ने संबंधित अभिलेख जब्त कर जांच शुरू की है। बारां में मार्बल कारोबारी के दस्तावेज जब्त बारां स्थित मैसर्स पीयूष स्टोन्स के यहां सर्वे के दौरान गोदाम में उपलब्ध माल का भौतिक सत्यापन किया गया। संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए। करदाता ने पांच लाख रुपए जमा कराने पर सहमति जताई, जिसमें से 2 लाख 3 हजार 272 रुपए नकद बही में जमा कराए गए। दस्तावेजों की जांच और स्टॉक के मूल्यांकन के बाद वास्तविक कर देयता तय की जाएगी। दो अन्य मामलों में 17.21 लाख रुपए जमा विभाग ने बिक्री छिपाने और कर देयता के मुकाबले अत्यधिक ITC इस्तेमाल करने की आशंका से जुड़े एक मामले में DRC-03 के माध्यम से 10.21 लाख रुपए नकद जमा कराए। वहीं, 14 अक्टूबर को हुई एक अन्य कार्रवाई में संबंधित कारोबारी ने सात लाख रुपए कैशबुक में जमा कराए। दोनों मामलों में खरीद-बिक्री के बिलों, लेखा पुस्तिकाओं और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन जारी है। दस्तावेजों की जांच के बाद तय होगी वास्तविक कर देयता वाणिज्यिक कर विभाग ने संबंधित करदाताओं को आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समन जारी किए हैं। जब्त दस्तावेजों, भौतिक स्टॉक, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और GST विवरणियों का मिलान कर वास्तविक कर देयता निर्धारित की जाएगी। विभाग ने कहा- कर चोरी, कारोबार छिपाने, गलत ITC का लाभ लेने और GST प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।