पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण में सरपंच, पंच के चुनाव परिणाम जारी हो गए। इन परिणामों में जनता ने परिवारवाद को नकार दिया। कई नेताओं के रिश्तेदारों को लोगों ने पंचायत की बजाय घरों का रास्ता दिखाया है। इन चुनाव में नेताओं ने अपने रिश्तेदारों को पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य से लेकर सरपंच और वार्ड पंच में खूब टिकट दिए। लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर के भाई की पत्नी ने बैरागढ़ ग्राम पंचायत से सरपंच का चुनाव लड़ा। लेकिन हार का सामना करना पड़ा। खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर के भाई की पत्नी ने ​िभलवाड़ी ग्राम पंचायत से चुनाव लड़ा, वह भी हार गईं। कांग्रेस के ही ब्लॉक अध्यक्ष फूलसिंह की पत्नी को भी भालता से हारना पड़ा। भाजपा मंडल अध्यक्ष रामसिंह मीणा ने की पत्नी और बहिन को हार का सामना करना पड़ा। आवर में बीजेपी नेता विमल जैन के पुत्र विपुल जैन को जनता ने बहुमत नहीं दिया। प्रमुख पार्टियों के पदाधिकारी रिश्तेदारों को जनप्रतिनिधि बनाने प्रयासरत रहते हैं। आम कार्यकर्ताओं के टिकट काटकर अपने रिश्तेदारों को दिए। लेकिन जनता इनको पसंद नहीं कर रही है। पिछले दिनों भवानीमंडी आए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी नसीहत दी थी कि अपने रिश्तेदारों को टिकट नहीं दें। अवंति के पिता पवन कुमार नयागांव मंदिर के पास निजी स्कूल संचालित करते हैं। अवंति इसी स्कूल में शिक्षिका होने के साथ व्यवस्थाओं में भी पिता का सहयोग करती हैं। अब वे शिक्षण कार्य से आगे बढ़कर पंचायत की जिम्मेदारी संभालेंगी। पूर्व विधायक कैलाश मीणा की दो भतीजी जीती पूर्व विधायक कैलाश मीणा की दो भतीजी सरपंच बनी हैं। पचौला ग्राम पंचायत में उनके भाई की बेटी भंवरी बाई को जीत मिली है। जबकि मैठून ग्राम पंचायत में भी उनके भाई की पुत्री शिमला बाई सरपंच बनी हैं। सबसे ज्यादा वोटों से जीते मोगरा के रामकुंवर जिले की अकलेरा, मनोहरथाना, डग और भवानीमंडी पंचायत समितियों में हुए चुनावों में सबसे ज्यादा वोटों से भवानीमंडी की मोगरा ग्राम पंचायत में जीत दर्ज हुई है।यहां रामकुंवर ने 1716 वोटों से जीत दर्ज की है। रामकुंवर को 2677 वोट मिले।