भास्कर संवाददाता | चूरू पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालातों के चलते डामर की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, साथ ही इसकी सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर चूरू समेत पूरे प्रदेश के सड़क निर्माण प्रोजेक्ट्स पर पड़ रहा है। सड़कों के निर्माण में हो रही देरी को देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदारों को बड़ी राहत देने के लिए नया फॉर्मूला लागू किया है। अब प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ने पर अतिरिक्त राशि का भुगतान अलग से किया जाएगा, वहीं डामर ना मिलने या काम रुकने की स्थिति में बिना किसी जुर्माने के 7 महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, इस राहत नीति का लाभ उन्हीं प्रोजेक्ट्स को मिलेगा जिनकी निर्माण अवधि (डेडलाइन) 28 फरवरी 2026 के बाद समाप्त हो रही है। विभाग अब ऐसे सभी निर्माणाधीन सड़क कार्यों की सूची और स्थिति की समीक्षा कर रहा है। नई व्यवस्था के तहत ठेकेदारों को वास्तविक इस्तेमाल किए गए डामर की मात्रा के आधार पर ही बढ़ी हुई दरों का अंतर दिया जाएगा। टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख से 28 दिन पहले की आईओसीएल रिफाइनरी की दर को आधार (बेस रेट) माना जाएगा। काम के दौरान डामर के जो दाम बढ़ेंगे, उनके अंतर का हिसाब लगाकर अलग से भुगतान होगा। यदि किसी एक महीने में डामर की दरें दो बार बदलती हैं, तो 1 और 16 तारीख की कीमतों का औसत निकाला जाएगा। जांच के बाद मिलेगी छूट, रिफाइनरी के बिल देना जरूरी: नए बदलाव के तहत जांच के बाद ही टाइम एक्सटेंशन मिलेगा। अगर डामर की सप्लाई में आ रही बाधा के कारण सड़क निर्माण रुका है, तो विभाग पहले पूरे मामले और देरी के कारणों की पड़ताल करेगा। सही पाए जाने पर ही 2 से 7 महीने की राहत दी जाएगी। किसी अन्य लापरवाही या वजह से हुई देरी पर यह छूट नहीं मिलेगी। इसके अलावा ठेकेदारों को डामर खरीद के वास्तविक प्रूफ के तौर पर आईओसीएल, बीपीसीएल या एचपीसीएल रिफाइनरी से खरीदे गए डामर के पक्के जीएसटी बिल जमा कराने होंगे। ^जिले में 28 फरवरी के बाद जो कार्य पूर्ण होने थे और जो डामर महंगा होने के कारण पूरे नहीं हो पा रहे थे, उनसे जुड़े संवेदकों को अब राहत दी जाएगी। विभाग के निर्देशानुसार ऐसे प्रोजेक्ट्स में अंतर राशि का भुगतान करेंगे और नियमानुसार डेडलाइन बढ़ाएंगे। -भीमसेन स्वामी, एसई, पीडब्ल्यूडी चूरू