एसओजी की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार जालोर के रानीवाड़ा स्थित भास्कर हॉस्पिटल का संचालक नानंजीराम चौधरी कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के जरिए डॉक्टर बना था। उसने 2015 के बाद देशभर के 8 शैक्षणिक संस्थानों की डिग्रियां हासिल कीं और 30 लाख रु. देकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में रजिस्ट्रेशन करवाया। इसके बाद वह खुद दलाल बन गया और एफएमजी परीक्षा पास नहीं करने वाले 18 डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन करवा दिए। अब एसओजी इन डॉक्टरों की जांच-प​ड़ताल कर रही है। नानंजी को एक हफ्ते पहले एसओजी ने पकड़ा था। नानंजी ने 50 बेड का अस्पताल बनाया; गुजरात के 2 डॉक्टरों को ठेके पर नौकरी भी दे दी एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि आरोपी नानंजी ने रानीवाड़ा में 50 बेड का अस्पताल खोला था। यहां गुजरात के दो डॉक्टरों को ठेके पर नौकरी भी दे दी। जांच की जा रही है कि अस्पताल ने सरकारी चिकित्सा योजनाओं का गलत फायदा तो नहीं उठाया। इसके लिए सीएमएचओ जालोर से दस्तावेज मंगवाए गए हैं। सीएमएचओ डॉ. भैराराम जानी ने बताया कि अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों को नोटिस भेजा गया है। अब एसओजी ने अस्पताल के दस्तावेज मांगे हैं। जालोर के 4 अस्पताल जांच के दायरे में हैं। जिस अस्पताल में पर्ची काटी उसी को खरीदा 2010 से 2012 : रानीवाड़ा में निजी चिकित्सक के क्लिनिक पर ओपीडी काउंटर पर पर्चियां काटता था। कुछ साल रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर काम किया। 2014 : बाद में राजदेव हॉस्पिटल में ओपीडी काउंटर पर पर्चियां काटने लगा। 2015 : राजदेव अस्पताल के मालिक से उसने अस्पताल ही खरीद लिया। 2016 : बाद में अस्पताल का नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल किया। 2019 : अस्पताल में गुजरात के स्त्री रोग विशेषज्ञ को नियुक्त किया। 8वीं बाद की सभी डिग्रियां फर्जी नानंजीराम ने 8वीं कक्षा पास की थी। इसके बाद 2015 से अब तक के शैक्षणिक दस्तावेज मोटी रकम देकर फर्जी तरीके से हासिल किए। इनमें आंध्र प्रदेश बोर्ड की 10वीं और 12वीं की अंकतालिकाएं, रामा यूनिवर्सिटी कानपुर की एमबीबीएस डिग्री और मुंबई के एक संस्थान का डीजीओ डिप्लोमा प्रमाणपत्र शामिल हैं। नानंजीराम के कुछ अन्य दस्तावेजों को भी फर्जी पाया गया। 2024 में पहली FIR दर्ज आरएमसी के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोपाल ने 6 अक्टूबर 2024 को अशोक नगर थाने में 8 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। बाद में जांच एसओजी को सौंप दी गई। जांच के दौरान नानंजीराम चौधरी का नाम सामने आया। आरोप है कि वह 22 महीने तक अस्पताल में डॉक्टर बनकर काम करता रहा। मामले में शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार, राम किशोर महावर और पंकज यादव के नाम हैं। इनमें केवल पंकज ही गिरफ्तार हुआ है।