स्कूली बच्चों को अब चॉकलेट, बिस्किट, पैकेटबंद जूस और दूसरे मीठे खाद्य पदार्थों में कितनी चीनी होती है इसकी जानकारी भी मिलेगी। प्रदेश के स्कूलों में ‘शुगर बोर्ड’ लगाकर विद्यार्थियों को चीनी के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान और स्वस्थ खानपान के बारे में जागरूक किया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों में इन बोर्डों की स्थापना और प्रदर्शन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल चीनी के सीधे सेवन के नुकसान बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचने वाली अतिरिक्त चीनी के प्रति भी जागरूक करना है। शुगर बोर्ड के माध्यम से विद्यार्थियों को चीनी के सेवन, उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों और स्वस्थ विकल्पों की जानकारी दी जाएगी। अत्यधिक चीनी सेवन से मोटापे सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। बाल अधिकार आयोग की एडवाइजरी के बाद निर्देश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी एडवाइजरी में विद्यालयों में शुगर बोर्ड लगाने की सलाह दी है। इसी क्रम में राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 1 अक्टूबर 2026 के पत्र के संदर्भ में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह पहल राष्ट्रीय पोषण माह के उद्देश्यों और प्रधानमंत्री के फिट इंडिया मूवमेंट से भी जुड़ी है। खाद्य पदार्थों के सेवन व स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति जागरूक करने की पहल