फर्मों के लिए तय की गई सख्त तकनीकी पात्रताएं निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विशेषज्ञता सुनिश्चित करने के लिए केवल अधिकृत संस्थाओं को ही पात्र माना जाएगा। संस्था का भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) से मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य है। वैध प्रोजेक्ट रिकॉग्निशन सर्टिफिकेट भी आवश्यक है। संस्था कम से कम 3 वर्ष पुरानी होनी चाहिए। वह सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट या ट्रस्ट एक्ट/कंपनीज एक्ट के तहत पंजीकृत हो। नीति आयोग के ‘दर्पण' पोर्टल पर पंजीकृत होना भी आवश्यक है। संस्था के पास विगत 3 वित्तीय वर्षों में किसी भी निकाय में न्यूनतम 10 हजार श्वानों की सफल नसबंदी (एबीसी व एआरवी) का कार्य अनुभव होना चाहिए। टीम में पशु चिकित्सा परिषद में पंजीकृत कम से कम दो पूर्णकालिक पशु चिकित्सक होने चाहिए। प्रशिक्षित पैरा-वेट/डॉग कैचर स्टाफ भी अनिवार्य है। पशु क्रूरता निवारण नियमों की पालना पर विशेष जोर दिया: श्वानों को पकड़ने के लिए केवल मानवीय विधियों (हैंड कैचिंग, बटरफ्लाई नेट या लूप विधि) का ही उपयोग किया जाएगा। लोहे के चिमटे, तार या क्रूर फंदों का उपयोग पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा। 6 माह से कम उम्र के पिल्लों और दूध पिलाने वाली मादाओं को नहीं पकड़ा जाएगा। सर्जरी से पूर्व श्वानों को कम से कम 12 घंटे उपवास (भोजन-जल बंद) पर रखा जाएगा। सर्जरी केवल योग्य डॉक्टरों द्वारा एनेस्थीसिया देकर की जाएगी। पश्चातवर्ती पहचान के लिए दाहिने कान पर निर्धारित वी-कट मार्क लगाया जाएगा। एंटी-रेबीज वैक्सीन भी लगाई जाएगी। सर्जरी के बाद नर श्वानों को कम से कम 4 दिन तक शेल्टर होम में उचित देखभाल में रखा जाएगा। मादा श्वानों को कम से कम 5 दिन तक रखा जाएगा। शेल्टर होम का बुनियादी ढांचा, शिकायत निवारण और जुर्माना: नगरपरिषद के सभापति अजय दावड़ा व आयुक्त मिल्खराज चुघ ने बताया कि संस्था की ओर से संचालित शेल्टर होम में नर, मादा, बीमार व आक्रामक श्वानों के लिए अलग-अलग केनल होने चाहिए। पक्की छत, स्वच्छ ढलानदार फर्श, ताजी हवा और रोशनी की समुचित व्यवस्था भी होनी चाहिए। प्राथमिक उपचार की सुविधा अनिवार्य है। 24 घंटे आपातकालीन दवाइयां भी उपलब्ध हों। सीसीटीवी निगरानी और बैकअप भी अनिवार्य किया गया है। राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) या कंट्रोल रूम पर डॉग बाइट अथवा आवारा कुत्तों की शिकायत मिलने पर एजेंसी को 24 घंटे के भीतर निस्तारण करना होगा। यदि सर्जरी या देखरेख में लापरवाही से किसी श्वान की मृत्यु होती है, तो संवेदक पर प्रति श्वान 2 हजार रुपए का दंड (पैनल्टी) लगाया जाएगा। भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर शहर में आवारा श्वानों (कुत्तों) की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नगरपरिषद ने व्यापक कदम उठाया है। नगरपरिषद प्रशासन ने 45 लाख रुपए की लागत वाले दो प्रमुख कार्यों के लिए ऑनलाइन निविदा आमंत्रित की है। इस पूरी परियोजना को केंद्र सरकार के एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2023 और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी 2025) के तहत संचालित किया जाएगा। निविदा दस्तावेज 28 अक्टूबर से डाउनलोड किए जा सकेंगे। 12 नवंबर 2026 तक ऑनलाइन तकनीकी व वित्तीय बोलियां जमा की जा सकेंगी। निविदाएं 13 नवंबर को खोली जाएंगी। आवारा श्वानों का टीकाकरण, नसबंदी एवं कृमिनाशन (डीवॉर्मिंग) : इस काम की अनुमानित लागत 25 लाख रुपए रखी गई है। अमानत राशि 50 हजार रुपए तय की गई है। शैक्षणिक संस्थानों व सार्वजनिक स्थलों से श्वानों का रेस्क्यू एवं शेल्टर होम में रख-रखाव: सरकारी व गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों एवं अन्य सार्वजनिक परिसरों से श्वानों को पकड़कर उनका टीकाकरण और नसबंदी की जाएगी। फिर नगरपरिषद के शेल्टर होम में भोजन और देखभाल उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए 20 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। अमानत राशि 40 हजार रुपए तय की गई है।