प्रदेश में अवैध खनन रोकने के लिए सभी जिलों में विभिन्न विभाग मिलकर विशेष अभियान चला रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, अवैध खनन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संभालने वाले खान एवं भूविज्ञान विभाग में विजिलेंस टीम को ही खत्म करने की तैयारी की जा रही है। विभाग को रिस्ट्रक्चर करने की आड़ में विजिलेंस व्यवस्था समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में पूर्व में भी प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन उस समय इसे निरस्त कर दिया गया था। अब एक बार फिर विभाग के रिस्ट्रक्चरिंग प्रस्ताव को लेकर यह आशंका जताई जा रही है। हालांकि, विभाग में इस मुद्दे पर कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। इस मामले में खान एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशक एमपी मीणा से बात की गई तो उन्होंने माना कि विभाग को रिस्ट्रक्चर करने का प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि, विजिलेंस टीम को खत्म करने के प्रस्ताव को लेकर सवाल पूछने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। हर सर्किल में विजिलेंस अधिकारी: विजिलेंस टीमों के लिए हर सर्किल में एक एसएमई (सुपरिंटेंडिंग माइनिंग इंजीनियर) स्तर का अधिकारी तैनात है। विभाग ने सर्किलों में एसएमई, एएमई और एमई स्तर के कुल 41 अधिकारियों के पद स्वीकृत कर रखे हैं। इनमें एसएमई विजिलेंस मुख्यालय उदयपुर, एसएमई विजिलेंस उदयपुर, भीलवाड़ा, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, भरतपुर और जयपुर सर्किल शामिल हैं। इस तरह 7 सर्किलों सहित एक मुख्यालय पर एसएमई विजिलेंस अधिकारियों की तैनाती है। ये टीमें एडीएम विजिलेंस की देखरेख में काम करती हैं। उदयपुर मुख्यालय में डेढ़ साल से एडीएम विजिलेंस का पद खाली खान एवं भूविज्ञान विभाग में विजिलेंस की भूमिका इसलिए भी अहम है, क्योंकि परिवहन विभाग, रोडवेज, एसीबी, एसओजी, पुलिस, आबकारी और जीएसटी सहित कई विभागों में अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए विजिलेंस टीमें होती हैं। इसके बावजूद खान विभाग में विजिलेंस व्यवस्था को खत्म करने का प्रस्ताव सामने आया है। पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में विभाग को रिस्ट्रक्चर करने के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। आरोप है कि इसी प्रक्रिया की आड़ में विजिलेंस को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। टीम खत्म होने से अवैध खनन बढ़ने की आशंका उदयपुर स्थित खान मुख्यालय में डेढ़ साल से एडीएम विजिलेंस का पद खाली है। वर्तमान में एसएमई को एडीएम का अतिरिक्त प्रभार दे रखा है। विजिलेंस टीम को किसी भी क्षेत्र में जाकर सीधे कार्रवाई का अधिकार है। यदि विजिलेंस व्यवस्था खत्म होती है या उसका दायरा सीमित किया जाता है तो स्थानीय स्तर पर अवैध खनन बढ़ने की आशंका है। अवैध खनन से पर्यावरण को भी नुकसान अवैध खनन से केवल सरकारी राजस्व की हानि नहीं होती, बल्कि इसके दुष्परिणाम पर्यावरण पर भी पड़ते हैं। अनियंत्रित खनन से भूजल स्तर प्रभावित होता है। पहाड़ियों का प्राकृतिक स्वरूप बदलता है। धूल और भारी वाहनों की आवाजाही से आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ता है। एक दिन में 200 स्टॉक पर कार्रवाई, 327 करोड़ का जुर्माना लगाया था अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई के लिए विजिलेंस टीम का होना जरूरी है। वर्ष 2019 में टोंक में एडीएम विजिलेंस रहते हुए एक ही दिन में 200 स्टॉक पर कार्रवाई कर 327 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। उस समय उनके पास केवल पांच लोगों की टीम थी। इसके बाद सरकार ने 200 होमगार्ड उपलब्ध कराए और 56 अलग-अलग टीमें बनाकर कार्रवाई की गई। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी विजिलेंस को खत्म करने का प्रस्ताव मंजूर हो गया था, लेकिन एक दिन में हुई कार्रवाई के बाद इसे निरस्त कर दिया गया। उन्होंने पूरे साल में 10 हजार करोड़ रुपए के अवैध खनन को पकड़ने का दावा किया। इस संबंध में 15 पेज की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी गई थी। इसमें उन अधिकारियों पर कार्रवाई करने की सिफारिश की गई थी, जिनके क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा था। विजिलेंस टीम बिना स्थानीय दबाव के किसी भी क्षेत्र में जाकर कार्रवाई कर सकती है। ऐसे में हर सर्किल और हर जोन में विजिलेंस टीम होनी चाहिए। यदि स्थानीय अधिकारी खनन संचालकों से मिल जाएं तो अवैध खनन पर रोक लगाना मुश्किल होगा। उनके अनुसार, विजिलेंस को सीधे खत्म नहीं किया जा सकता, इसलिए रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर इसे हटाने का प्रयास किया जा रहा है। दीपक तंवर, पूर्व निदेशक, खान एवं भूविज्ञान विभाग