नटवाड़ा| धार्मिक आस्था, व्रत, उपासना, दान-पुण्य के लिए खास माने जाने वाले कार्तिक मास में श्रद्धा और भक्ति का संगम दिखेगा। 29 अक्टूबर को करवा चौथ से त्योहारों का सिलसिला शुरू होगा। यह 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा और देव दिवाली तक चलेगा। करीब 30 दिन में 15 दिन व्रत, पर्व, धार्मिक आयोजन होंगे। दीपोत्सव, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ पूजा, देवउठनी एकादशी, कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों पर घरों से मंदिरों तक धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी। श्रद्धालु भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी की आराधना करेंगे। दीपदान होगा। तुलसी पूजन होगा। पवित्र स्नान की परंपरा निभाई जाएगी। कार्तिक मास में सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी। माताएं संतान की खुशहाली की कामना करेंगी। धनतेरस से दीपोत्सव की रौनक बढ़ेगी। दीपावली पर घर-आंगन दीपों से जगमगाएंगे। गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगेगा। छठ पर्व पर व्रती महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य, उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देंगी। परिवार की मंगलकामना करेंगी। कार्तिक मास के पर्व प्रकृति, जीव-जंतुओं के प्रति श्रद्धा का संदेश भी देते हैं। गोवर्धन पूजा में प्रकृति संरक्षण का संदेश माना जाता है। गोपाष्टमी में गोसेवा का महत्व बताया जाता है। आंवला नवमी में वृक्षों के महत्व को दर्शाया जाता है। तुलसी विवाह से तुलसी के पौधे का धार्मिक, सांस्कृतिक महत्व रेखांकित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले स्नान, भगवान विष्णु का नाम स्मरण, दीपदान पुण्यकारी माना जाता है। श्रद्धालु मंदिरों, तुलसी के पौधों, जलाशयों के किनारे दीप जलाते हैं। जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान की परंपरा भी रहती है। गोसेवा होती है। धार्मिक ग्रंथों का पाठ होता है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है। चातुर्मास का समापन माना जाता है। विवाह सहित मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र स्नान होगा। दान-पुण्य होगा।