टोंक समेत राजस्थान के सभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को चीनी के अत्यधिक सेवन से होने वाले नुकसान और स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूक करने के लिए ‘शुगर बोर्ड’ लगाए जाएंगे। इसके साथ ही शिक्षक बच्चों को चीनी के अधिक सेवन से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी देंगे और उन्हें संतुलित आहार अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। प्रारंभिक शिक्षा एवं पंचायती राज (प्रारंभिक शिक्षा) विभाग, बीकानेर के निदेशक ललित कुमार ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (मुख्यालय), प्रारंभिक शिक्षा को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह पहल राष्ट्रीय पोषण माह के उद्देश्यों और प्रधानमंत्री के फिट इंडिया मूवमेंट से प्रेरित है। इसका उद्देश्य बच्चों में कम उम्र से ही स्वस्थ खानपान की आदतें विकसित करना और चीनी के अत्यधिक सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। खाद्य पदार्थों में छिपी चीनी की भी मिलेगी जानकारी राष्ट्रीय पोषण माह हर साल सितंबर में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने, स्वस्थ आहार व्यवहार को प्रोत्साहित करने और कुपोषण की रोकथाम के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसी क्रम में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने अपनी एडवाइजरी में विद्यालयों में शुगर बोर्ड लगाने की सलाह दी है। इन बोर्ड के माध्यम से विद्यार्थियों को चीनी के सेवन, विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद अतिरिक्त चीनी और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी दी जाएगी। इससे बच्चे रोजाना खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा को लेकर सजग हो सकेंगे और स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रेरित होंगे। सभी जिलों में बोर्ड लगाने के निर्देश राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 1 अक्टूबर 2026 के पत्र के संदर्भ में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के विद्यालयों में शुगर बोर्ड की स्थापना और प्रदर्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूलों में बोर्ड लगाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सही खानपान की आदतों के प्रति जागरूक करना भी है। बोर्ड के माध्यम से नियमित जागरूकता गतिविधियां संचालित होने पर बच्चों के साथ उनके परिवारों तक भी स्वस्थ खानपान का संदेश पहुंच सकता है। जीवनशैली के लिए प्रेरित करेंगे बोर्ड शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि विद्यालयों में शुगर बोर्ड लगाने की पहल बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। शिक्षकों को चाहिए कि वे विद्यार्थियों को चीनी के अत्यधिक सेवन से होने वाले नुकसान और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दें, ताकि बचपन से ही उनमें स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित हो सके।