मनोहरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में नमक और बजरी मिलाकर नकली उर्वरक पोटाश (खाद) बनाने के मामले में मनोहरपुर थाना पुलिस ने दो फैक्ट्री संचालकों को गिरफ्तार किया है। दोनों एक साल से फरार थे। ये बजरी और नमक में लाल रंग मिलाकर 50-50 किलो के कट्टे तैयार कर रहे थे। इस बजरी और नमक की कुल कीमत महज 70 हजार रुपए थी, जिसे ब्रांडेड कट्टों में पैक कर किसानों को 61.80 लाख रुपए में बेचने की तैयारी थी। यह मिलावटी नकली खाद 4120 कट्टों में बाजार में पहुंचती, उससे पहले ही विभाग ने फैक्ट्री पर छापा मार दिया था। तब से दोनों आरोपी फरार थे। रोड़ी-बजरी-सीमेंट मिलाने का मिक्सर लगाया और फैक्ट्री चालू जयपुर ग्रामीण एसपी हनुमान प्रसाद मीणा ने बताया कि 8 अगस्त 2025 को शाहपुरा के सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय के उर्वरक बीज कीटनाशक निरीक्षक डॉ. हरबख्श चौधरी ने मनोहरपुर औद्योगिक क्षेत्र में अवैध उर्वरक निर्माण व भंडारण फैक्ट्री पकड़ी थी। मामले में फरार आरोपी राकेश शर्मा निवासी बौंली सवाई माधोपुर हाल मुरलीपुरा-जयपुर और निखिल शर्मा (29) निवासी झोटवाड़ा-जयपुर को गिरफ्तार किया है। राकेश ने मुरलीपुरा में किराए पर मकान ले रखा था। वह यहां छिपकर रह रहा था। आरोपियों ने मनोहरपुर में छत भरने का मिक्सर लगाया और फैक्ट्री शुरू कर दी। बता दें कि देश में उर्वरक निर्माण का लाइसेंस गुरुग्राम से दिया जाता है और फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985 (FCO) के तहत संबंधित राज्य सरकार के कृषि विभाग/पंजीयन प्राधिकारी द्वारा जारी किया जाता है। जिस राज्य में फैक्ट्री स्थापित होती है, वहीं का प्राधिकारी लाइसेंस देता है। राजस्थान में उर्वरक निर्माण लाइसेंस के लिए आवेदन राजस्थान कृषि विभाग के माध्यम से किया जाता है। फैक्ट्री से मिला था नकली खाद का जखीरा एडिशनल एसपी शाहपुरा रणवीर सिंह ने बताया कि 8 अगस्त 2025 में हुई छापेमारी में गोदाम की तलाशी लेने पर पुलिस और कृषि विभाग को भारी मात्रा में अवैध सामग्रियां मिली थीं। मौके से 50-50 किलो के 772 गुलाबी रंग के और 230 पीले रंग के ‘पोटाश डेरिव्ड फॉर्म मोलासेस’ उर्वरक के कट्टे मिले थे। खाद बनाने में प्रयुक्त होने वाला 50-50 किलो का 914 बैग कच्चा माल (नमक), 254 बिना सिलाई किए बैग, सिलाई मशीन, मिक्सर मशीन और 2000 खाली कट्टे बरामद किए थे। एक खाद के कट्टे की कीमत 1500 रुपए बताई जा रही है। 1 साल से बंद मोबाइल चालू होते ही पकड़ा सीओ शाहपुरा लक्ष्मीनारायण सैनी ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के उल्लंघन में की गई थी। फरार होने के बाद आरोपियों ने मोबाइल बंद कर दिए थे। कुछ दिन पहले चालू किए, वैसे ही ट्रेकिंग शुरू कर दी। लोकेशन पुख्ता होते ही थानाधिकारी मनोहरपुर आशुतोष कुमार की टीम ने दोनों को पकड़ लिया।