भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के तहत टिड्डी-सह-एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र द्वारा जैसलमेर जिले के सावला गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रभारी अधिकारी व वनस्पति संरक्षण अधिकारी कीट विज्ञान अमित कुमार मीणा ने किसानों को असली व नकली कीटनाशकों की पहचान करने के तरीके बताए। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व पर बल देते हुए सीमित मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग करने की सलाह दी, ताकि फसलों के मित्र कीटों का संरक्षण हो सके और प्राकृतिक संतुलन बिगड़े बिना रसायनों के अंधाधुंध उपयोग से बचा जा सके। कृषि पर्यवेक्षक रामनारायण कुमावत ने किसानों को ट्राइकोडर्मा से बीज व भूमि उपचार की तकनीक सिखाई। उन्होंने बुवाई से पहले मृदा उपचार को प्राथमिकता देने और रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग अंतिम विकल्प के रूप में करने पर जोर दिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को नकली उत्पादों से होने वाले नुकसान से बचाना रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान व ग्रामीण मौजूद रहे। केंद्र के वैज्ञानिक सहायक पवनसिंह पनौरा ने किसानों को कीटनाशक खरीदते समय पैकिंग और सील की अच्छी तरह जांच करने को कहा। उन्होंने बताया कि उत्पाद के साथ लीफलेट होना जरूरी है। पैकेट पर अंकित पंजीकरण संख्या और बैच नंबर से उत्पाद की प्रमाणिकता जांची जा सकती है। इसके अलावा किसान सीआईबीआरसी की आधिकारिक वेबसाइट और पैकेट पर दिए क्यूआर या बारकोड को स्कैन कर जानकारी ले सकते हैं। उन्होंने निर्माण, एक्सपायरी तिथि जांचने और पक्का जीएसटी बिल लेने की सलाह दी।