झुंझुनूं नगर परिषद का वार्ड 49 इस बार शहर के सबसे चर्चित वार्डों में शामिल है। यहां चुनावी मुकाबले से ज्यादा भाजपा के अंदर की नाराजगी चर्चा में है। भाजपा ने विधायक राजेंद्र भांबू के दामाद मनु धनखड़ को प्रत्याशी बनाया है। टिकट मिलने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने निर्दलीय नामांकन भर दिया था। पार्टी ने ज्यादातर बागियों को समझाकर नामांकन वापस करवा लिया, लेकिन डॉ. कमलचंद सैनी चुनाव मैदान में डटे रहे। अब इस वार्ड में मुख्य मुकाबला भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी मनु धनखड़ और निर्दलीय डॉ. कमलचंद सैनी के बीच है। टिकट के बाद शुरू हुई नाराजगी वार्ड 49 को भाजपा का प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। यहां से विपुल छक्खड़, प्रमोद खंडेलिया, मंजू चौहान, डॉ. कमलचंद सैनी, नवल स्वामी, राजेंद्र ठठेरा और श्रीराम सैनी सहित कई नेताओं ने भाजपा टिकट की दावेदारी की थी। पार्टी ने मनु धनखड़ को टिकट दिया। इसके बाद कई दावेदार नाराज हो गए और निर्दलीय नामांकन भरकर चुनाव मैदान में उतर गए। इसके बाद विधायक राजेंद्र भांबू और भाजपा संगठन के दूसरे नेताओं ने बागियों से बात की। लगातार बैठकें और समझाइश के बाद ज्यादातर बागियों ने नामांकन वापस ले लिया। लेकिन डॉ. कमलचंद सैनी ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया। मनु धनखड़ - भाजपा भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी पार्टी संगठन का समर्थन साफ-सफाई और सीवरेज सुधार पर फोकस सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने की बात डॉ. कमलचंद सैनी - निर्दलीय भाजपा के बागी उम्मीदवार पहले विधानसभा टिकट के दावेदार रहे नगर परिषद टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव मैदान में भाजपा बनाम भाजपा के बागी अब वार्ड में चुनावी चर्चा भाजपा के अंदर की खींचतान पर ज्यादा है। एक तरफ भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी मनु धनखड़ हैं, जिन्हें पार्टी संगठन का समर्थन मिल रहा है। दूसरी तरफ डॉ. कमलचंद सैनी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। वे लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं। टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने बागी होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया। इस मुकाबले में भाजपा के परंपरागत वोट कितने एकजुट रहते हैं और बगावत का कितना असर होता है, यह चुनाव परिणाम में अहम हो सकता है। विधानसभा उपचुनाव में भी टिकट मांगा था डॉ. कमलचंद सैनी इससे पहले विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा टिकट के दावेदार रहे थे। उस समय पार्टी ने उन्हें समझाकर चुनाव से दूर किया था और राजेंद्र भांबू को प्रत्याशी बनाया था। इस बार उन्होंने नगर परिषद चुनाव में भी भाजपा टिकट की दावेदारी की, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए। परिसीमन के बाद बदला वार्ड परिसीमन के बाद पुराने वार्ड 47, 48, 51 और 52 के कुछ हिस्सों को मिलाकर नया वार्ड 49 बनाया गया है। इससे वार्ड की सीमा और मतदाताओं की संख्या में बदलाव हुआ है। इसके साथ ही चुनावी समीकरण भी बदले हैं। पिछले चुनाव में यह इलाका वार्ड 52 का हिस्सा था। वहां से निर्दलीय प्रत्याशी नीतू सैनी चुनाव जीती थीं। महाजन मतदाता सबसे ज्यादा वार्ड में कुल 1146 मतदाता हैं। इनमें महाजन समाज के मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके बाद ब्राह्मण, अल्पसंख्यक, सैनी और स्वामी समाज के मतदाता हैं। इन मतदाताओं के वोट चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सीवरेज और सफाई भी मुद्दे भाजपा के अंदर की बगावत चुनाव का बड़ा मुद्दा बनी हुई है। इसके साथ ही स्थानीय लोग साफ-सफाई, सीवरेज और दूसरी जरूरी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं भी उठा रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी मनु धनखड़ का कहना है कि पिछले कुछ सालों में वार्ड में कई विकास कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो सीवरेज और सफाई व्यवस्था में सुधार करना उनकी प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं का फायदा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर भी काम किया जाएगा। वहीं डॉ. कमलचंद सैनी अपने लंबे समय के संगठन से जुड़ाव और स्थानीय लोगों के साथ संपर्क के आधार पर चुनाव प्रचार कर रहे हैं।