सांवरा गांव में हाली अमावस्या के अवसर पर करणीसर तालाब पर सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह पहल उरमुल सीमांत समिति बज्जू और एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से संचालित जलधारा परियोजना के अंतर्गत की गई। कार्यक्रम में गांव के महिला-पुरुषों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। जलधारा परियोजना के तहत आयोजित ग्राम सभाओं, जल समिति प्रशिक्षण, जल बजट और ट्रांजेक्ट वॉक जैसी गतिविधियों ने ग्रामीणों को जल संकट के प्रति जागरूक किया। इसी जागरूकता के चलते गांववासियों ने करणीसर तालाब के पुनरोद्धार का निर्णय लिया। श्रमदान के दौरान तालाब के संरक्षण और उसकी नियमित देखभाल के लिए सामूहिक जिम्मेदारी भी तय की गई। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की रही सक्रिय भागीदारी इस श्रमदान कार्यक्रम में सरपंच प्रतिनिधि प्यारेलाल छंगाणी सहित गांव के वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। देवदत्त साध, करणाराम, उमेदा राम सुथार, मूलाराम, नखताराम, सोनाराम, चौथाराम, कैलाशदान चारण, जुगताराम, दीनदयाल जाट, शैतानाराम कुमावत, गणेश कुमावत, अनिल ढोली, नैनी देवी, केंकू देवी, सुरजा देवी, लक्ष्मी देवी, परमेश्वरी, भंवरी, कमला और इमरताराम सहित करीब 80 ग्रामीणों ने तालाब संरक्षण का संकल्प लिया। संस्था के सहयोग से मिला अभियान को बल जिला कार्यक्रम समन्वयक पुखराज जयपाल की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में संस्था की ओर से तेजस्वी सिंह, कंवर सिंह, भोजराज सिंह और रविकांत ने भी सक्रिय सहयोग दिया। सभी ने मिलकर तालाब के संरक्षण और उसके विकास के लिए श्रमदान किया। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि वे नियमित रूप से श्रमदान कर करणीसर तालाब को संरक्षित और विकसित करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और भविष्य में जल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है।