उपखंड के रतननगर में वर्षों पुराने खेजड़ी के पेड़ों के सूखने से किसानों और पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है। पेड़ों की शाखाएं सूख रही हैं और जड़ों के आसपास सफेद रंग की कठोर परत जम रही है। ग्रामीणों के अनुसार, खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल के बावजूद समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। खेजड़ी के पेड़ों के सूखने के पीछे मिट्टी में लवणता बढ़ना, सिंचाई के पानी की गुणवत्ता या जड़ों से जुड़ी किसी बीमारी जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक समस्या की वास्तविक वजह की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसानों ने प्रभावित क्षेत्र का सर्वे करवाकर मिट्टी, पानी और पेड़ों की जड़ों की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है, ताकि कारणों का पता लगाकर उचित उपचार किया जा सके। मरुस्थलीय पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है खेजड़ी खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में इसका विशेष महत्व है। यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संतुलन और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में रतननगर में वर्षों पुराने पेड़ों का सूखना चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि समय रहते समस्या के कारणों का पता लगाकर उपचार नहीं किया गया तो क्षेत्र के अन्य खेजड़ी के पेड़ भी प्रभावित हो सकते हैं। किसानों ने संबंधित विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए वैज्ञानिक जांच करवाने और पेड़ों को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।