नगर परिषद चुनाव में नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी पूरी होते ही अब चुनाव पूरी तरह गलियों और मोहल्लों में पहुंच गया है। भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी सुबह से शाम तक अपने-अपने वार्डों में घर-घर जाकर लोगों से समर्थन मांग रहे हैं। लेकिन इस बार प्रचार सिर्फ हाथ जोड़ने और वोट मांगने तक सीमित नहीं है। हर गली में लोगों के पास अपनी मांगों की अलग सूची है। कोई टूटी सड़क दिखा रहा है तो कोई गंदगी और नालियों की शिकायत कर रहा है। कहीं स्ट्रीट लाइट का मुद्दा उठ रहा है तो कहीं पानी की व्यवस्था को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। पिछले करीब दो साल से नगर निकाय चुनाव नहीं होने के कारण पार्षदों का कार्यकाल भी खत्म हो चुका था। ऐसे में कई वार्डों में छोटे-बड़े विकास काम भी अटक गए। अब जब प्रत्याशी वोट मांगने लोगों के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं तो वार्डवासी भी बिना झिझक अपनी बात रख रहे हैं। दिलचस्प बात यह रही कि हर वार्ड का माहौल अलग दिखाई दिया। कहीं लोगों ने पुराने कामों को याद कर दोबारा भरोसा जताया तो कहीं साफ कह दिया कि इस बार वोट उसी को मिलेगा जो सबसे पहले सड़क, सफाई और नालियों की समस्या दूर करेगा। वार्ड-14 : "काम दिखा है, इसलिए दोबारा मौका देंगे", महिला ने दिया आशीर्वाद वार्ड नंबर 14 में प्रचार के दौरान माहौल बाकी वार्डों से कुछ अलग नजर आया। भाजपा प्रत्याशी शांतिलाल जाट जब एक घर पहुंचे तो वहां की महिला ने उनका स्वागत किया, आशीर्वाद दिया और दोबारा समर्थन देने की बात कही। बातचीत के दौरान जब उन्होंने वार्ड की परेशानी पूछी तो महिला ने कहा कि सड़क और स्ट्रीट लाइट को लेकर उन्हें कोई खास शिकायत नहीं है और पहले हुए कामों से वह संतुष्ट हैं। शांतिलाल जाट इसी वार्ड से पिछले कार्यकाल में भी पार्षद रहे हैं। 33 वर्षीय शांतिलाल ने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। उनके सामने कांग्रेस ने 34 वर्षीय नितिन वर्मा को मैदान में उतारा है। नितिन बीकॉम और एलएलबी कर चुके हैं। वे छात्रसंघ अध्यक्ष, शहर कांग्रेस महासचिव और युवा कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष जैसे पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। यह उनका पहला नगर परिषद चुनाव है। वार्ड-15 : दुकानदार ने गिनाईं दिक्कतें, बोले- सड़क, नालियां और लाइट सबसे बड़ी जरूरत वार्ड नंबर 15 में कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत संत पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। जिला हॉस्पिटल में नर्सिंग ऑफिसर के पद से रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने चुनावी मैदान में कदम रखा है। प्रचार के दौरान एक दुकानदार ने उन्हें रोककर वार्ड की कई समस्याएं बताईं। दुकानदार का कहना था कि कई जगह सड़कें टूट चुकी हैं, नालियों की हालत खराब है और स्ट्रीट लाइट भी पर्याप्त नहीं है। हेमंत संत ने लोगों की बातें सुनीं और भरोसा दिलाया कि मौका मिलने पर इन समस्याओं को प्राथमिकता से उठाया जाएगा। हेमंत संत बीए पास हैं और जनरल नर्सिंग में डिप्लोमा भी कर चुके हैं। पिछले चुनाव में इस वार्ड से कांग्रेस के सुमंत सुहालका पार्षद थे। इस बार उनके सामने भाजपा ने अनिल ईनाणी को उम्मीदवार बनाया है। अनिल ईनाणी पहले वार्ड नंबर 38 से पार्षद रह चुके हैं। वे बीकॉम ग्रेजुएट हैं और एबीवीपी के सचिव, भाजपा नगर महामंत्री तथा भाजपा मंडल सदस्य सहित कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वार्ड-45 : "वोट तो देंगे, लेकिन पहले सड़क बनवाना", लोगों की नाराजगी सबसे ज्यादा दिखी वार्ड नंबर 45 में चुनाव प्रचार के दौरान सबसे ज्यादा नाराजगी देखने को मिली। भाजपा प्रत्याशी रतन तड़वा जब लोगों से समर्थन मांगने पहुंचे तो एक महिला ने बिना किसी झिझक के अपनी बात रख दी। उसने कहा, "वोट तो हम दे देंगे, लेकिन पहले सड़क बनवाना। जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। सफाई भी ठीक नहीं होती। पिछले पार्षद ने कोई काम नहीं कराया, अब आपसे उम्मीद है।" वार्ड के कई लोगों ने भी सड़क और सफाई को सबसे बड़ी समस्या बताया। इस वार्ड से पिछले कार्यकाल में कांग्रेस के देवराज साहू पार्षद थे और प्रचार के दौरान कुछ लोगों ने उनके कार्यकाल को लेकर नाराजगी भी जताई। इस बार भाजपा ने 49 वर्षीय रतन तड़वा को टिकट दिया है। रतन 11वीं पास हैं और साल 2009 में निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। बाद में उन्होंने कांग्रेस का समर्थन किया था। अब भाजपा के प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। उनके सामने कांग्रेस ने शहर ब्लॉक अध्यक्ष के बेटे धर्मेंद्र मूंदड़ा को उम्मीदवार बनाया है। वार्ड-59 : स्वागत भी हुआ, शिकायतें भी मिलीं... मेन रोड और नालियों का मुद्दा सबसे आगे चंदेरिया का वार्ड नंबर 59 भी चुनाव प्रचार के दौरान चर्चा में रहा। भाजपा प्रत्याशी पूरन सिंह राणा जब वार्ड में घर-घर पहुंचे तो कुछ लोगों ने उनका स्वागत किया और समर्थन भी जताया, लेकिन बातचीत आगे बढ़ी तो लोगों ने मेन रोड और नालियों की समस्या सामने रख दी। वार्डवासियों का कहना था कि पिछले करीब दो साल से मुख्य सड़क की हालत खराब है। बरसात में परेशानी और बढ़ जाती है, इसलिए सबसे पहले सड़क ठीक कराई जानी चाहिए। चंदेरिया इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण यहां रोड का काम सबसे जरूरी हैं। नालियों की सफाई भी नियमित नहीं होने की शिकायत लोगों ने की। 39 वर्षीय पूरन सिंह राणा एमएसडब्ल्यू (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) की पढ़ाई कर चुके हैं और दूसरी बार पार्षद चुनाव लड़ रहे हैं। वे पहले भी इसी वार्ड से पार्षद रह चुके हैं और एबीवीपी व आरएसएस से जुड़े रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस ने अनिल सैनी को उम्मीदवार बनाया है। गलियों में दिखने लगा चुनाव का असली मुद्दा चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर में ही यह साफ नजर आने लगा है कि इस बार वार्डों में राजनीतिक चर्चा से ज्यादा स्थानीय समस्याओं पर बात हो रही है। प्रत्याशी जहां अपनी बात और योजनाएं लोगों तक पहुंचा रहे हैं, वहीं वार्डवासी भी सड़क, सफाई, नालियां, स्ट्रीट लाइट और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर खुलकर अपनी अपेक्षाएं बता रहे हैं। अलग-अलग वार्डों का माहौल भले अलग हो, लेकिन एक बात लगभग हर जगह समान दिखाई दी कि लोग अपने मोहल्ले में काम चाहते हैं। प्रचार के दौरान मिल रहे यही फीडबैक अब प्रत्याशियों के लिए चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनते नजर आ रहे हैं। चुनावी माहौल के बीच फिलहाल गलियों में सबसे ज्यादा चर्चा विकास के इन्हीं मुद्दों की है।