राजस्थान आवासन मंडल के सेवानिवृत्त कर्मचारी धर्मेंद्र माथुर को कर्मचारी कोटे में भूखंड पाने के लिए करीब दो दशक तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। तीन बार कोर्ट से राहत मिलने के बाद मई 2026 में भूखंड आवंटित हुआ, लेकिन अब कीमत और दस्तावेजों की गड़बड़ी में मामला उलझ गया है। मंडल ने पहले 85 लाख रुपए का मांग-पत्र जारी किया, फिर संशोधित कर करीब 1 करोड़ 65 लाख 35 हजार रुपए की मांग कर दी। माथुर का दावा है कि उनसे करीब 86 लाख रुपए अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं। दूसरी ओर, खाली भूखंड के दस्तावेजों में फ्लैट दर्ज होने से बैंक ने पहले स्वीकृत 1 करोड़ 75 लाख रुपए का लोन भी रोक दिया है। माथुर ने वर्ष 2002 में कर्मचारी आवास योजना के तहत प्रताप नगर, सांगानेर के सेक्टर-26 में भूखंड के लिए आवेदन किया था। वर्ष 2006 में अन्य कर्मचारियों को भूखंड आवंटित हो गए, लेकिन रजिस्ट्रेशन राशि कम होने का हवाला देकर उन्हें लॉटरी में शामिल नहीं किया गया। माथुर के अनुसार, उन्होंने पूरी राशि जमा कर दी थी। इसके बावजूद भूखंड नहीं मिला। 2007 में पेनल्टी वसूली, 2014 में 3 लाख जमा कराए माथुर के अनुसार, आवासन मंडल ने राशि जमा करने में देरी के आधार पर वर्ष 2007 में उनसे 13,163 रुपए की पेनल्टी वसूली। वर्ष 2014 में मंडल ने सीज मनी का पत्र जारी किया। इसके बाद माथुर ने मांग के अनुसार तीन लाख रुपए भी जमा करा दिए, लेकिन भूखंड आवंटित नहीं हुआ। वर्ष 2015 में माथुर ने कोर्ट में याचिका दायर की। 5 नवंबर 2015 को सिंगल बेंच ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। मंडल ने इसे डिविजनल बेंच में चुनौती दी। वर्ष 2024 में डिविजनल बेंच ने भी माथुर के पक्ष में निर्णय देते हुए 6 नवंबर 2015 की दर पर भूखंड आवंटित करने के आदेश दिए। मंडल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां वर्ष 2025 में माथुर के पक्ष में आदेश हुआ। इसके बाद मंडल की रिव्यू पिटिशन भी जनवरी 2026 में खारिज हो गई। आखिर मई 2026 में माथुर को 277.20 वर्गमीटर का भूखंड आवंटित किया गया। मौके पर खाली भूखंड, दस्तावेजों में फ्लैट मिला, लोन रोका भूखंड आवंटन के बाद माथुर दस्तावेज लेकर बैंक पहुंचे। बैंक ने दस्तावेजों के आधार पर 1 करोड़ 75 लाख रुपए का लोन स्वीकृत कर दिया। इसमें लीज राशि भी शामिल थी। लेकिन बैंक की टीम मौका निरीक्षण के लिए पहुंची तो वहां खाली भूखंड मिला, जबकि दस्तावेजों में फ्लैट दर्ज था। इस अंतर के कारण बैंक ने लोन रोक दिया। माथुर का कहना है कि वे दस्तावेजों की गलती दुरुस्त कराने के लिए लगातार आवासन मंडल के चक्कर काट रहे हैं।