दिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों के 2,400 करोड़ रुपए सरकार ने रोक रखी है। अलग-अलग मद की राशि में दिवाली वाला बोनस भी है। इसका एक चौथाई हिस्सा ही 112 करोड़ रुपए है। इसके साथ ही सरकारी सेवा से निवृत्त होने वाले कर्मचारियों के करीब 500 करोड़ रुपए और मौजूदा कर्मचारियों की उपार्जित अवकाश (पीएल) के करीब 1800 करोड़ रुपए की राशि भी अटकी हुई है। यानी सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों के बकाया पेंशन परिलाभ, मौजूदा कर्मचारियों के उपार्जित अवकाश और दीपावली बोनस को मिलाएं तो यही 2400 करोड़ रुपए के आसपास बनती है। महंगाई और त्योहार के खर्च के दबाव के बावजूद सरकार उनके ही हक की राशि का भुगतान नहीं कर रही। 8 से 10 माह के रिटायर्ड को नहीं मिल रहा परिलाभ असल में 8 से 10 महीने पहले सेवानिवृत्त हुए 200 से अधिक कर्मचारियों के सेवानिवृति पेंशन उन्हें नहीं मिले हैं। इन परिलाभों की गणना करें तो एक-एक कर्मचारियों को 25 से 60 लाख रुपए तक के परिलाभ मिलते हैं। यदि न्यूनतम परिलाभ का आकलन भी करें तो सरकार की ओर से रोकी गई राशि करीब 500 करोड़ रुपए के पार पहुंचती है। 7 लाख कर्मचारियों को 8 माह से रोकी राशि 7 लाख कर्मचारियों का पीएल अप्रैल से रोका हुआ है। यदि इसे औसतन 25 हजार प्रति कर्मचारी भी मानें तो यह 1,800 करोड़ रुपए तक पहुंचती है। कर्मचारियों की लंबी लड़ाई भी सरकार को पीएल की राशि नहीं दिला पाई। कोरोना में काटा था बोनस, आज तक वही स्थिति कोरोना काल के समय पिछली गहलोत सरकार ने दिवाली बोनस की राशि में से 25 प्रतिशत राशि काट ली थी। उसके बाद से अब तक वही पैटर्न चला आ रहा है। यानी दीपावली बोनस में भी कर्मचारियों को पूरा पैसा नकद नहीं मिल रहा। वित्त विभाग के अनुसार कर्मचारियों को 30 दिन के वेतन-भत्तों के बराबर अधिकतम 6,774 रुपए बोनस मिलेगा। इसमें 75% यानी 5,081 रुपए नकद और 25% यानी 1,694 जीपीएफ खाते में जमा होंगे। करीब 7 लाख कर्मचारियों का यह बोनस लगभग 112 करोड़ रुपए बनता है। कर्मचारियों के उपार्जित अवकाश, सेवानिवृत्ति परिलाभ एवं बोनस के हजारों करोड़ रोककर सरकार वित्तीय हितों पर कुठाराघात कर रही है। सरकार को कर्मचारियों की राशि का दीपावली पूर्व भुगतान कर राहत प्रदान करनी चाहिए। -महावीर शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ उपार्जित अवकाश की राशि लगातार वित्त विभाग जारी कर रहा है। आज व कल भी राशि जारी की गई है। बोनस की राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा काटा नहीं जा रहा, कर्मचारियों के जीपीएफ खाते में जमा कराया जा रहा है। - वैभव गालरिया, प्रमुख सचिव, वित्त, राजस्थान