जिला अस्पताल में सड़कें कई साल से क्षतिग्रस्त हैं। मरीज रोज परेशान होते रहे। अब 21 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी का पचपदरा में रिफाइनरी उद्घाटन करेंगे। इस बीच तैयारियों को लेकर बाड़मेर में लगातार राज्य के मुख्यमंत्री, केबिनेट मंत्री सहित अन्य भाजपा के पदाधिकारियों के दौरे हो रहे है। ऐसे में जिला अस्पताल में बिगड़ी व्यवस्थाओं को लेकर कभी भी निरीक्षण हो सकता है। इसके लिए आनन-फानन में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बिना टेंडर के 100 मीटर सड़क तो बना दी, लेकिन ये महज 2-3 दिन में ही बिखर गई। सवाल ये है कि सड़क के लिए न तो टेंडर हुए और न गुणवत्ता का ध्यान रखा गया। ठेकेदार को मौखिक आदेश देकर सड़क बनवाई गई। भुगतान किसी दूसरे काम में समायोजित करने को कहा गया। ठेकेदार ने रात में सड़क बना दी। मानकों के अनुरूप नहीं बनी। काम के दौरान पुरानी क्षतिग्रस्त सड़क पर जमी रेत भी ठीक से साफ नहीं की गई। सीधे डामर बिछा दिया गया। सड़क पर रोलर भी नहीं चलाया। मरीजों के वाहन गुजरे तो सड़क उखड़ गई अस्पताल में करीब 100 मीटर सड़क बनाई गई। कुछ जगह पेचवर्क हुआ। दूसरे दिन मरीजों के वाहन गुजरे तो सड़क उखड़ गई। अस्पताल अधीक्षक डॉ. हनुमानराम चौधरी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। उन्हें न बजट की जानकारी है, न गुणवत्ता की। पीडब्ल्यूडी एक्सईएन बबलू मीणा ने बताया कि एडीएम के कहने पर इमरजेंसी में काम कराया। इसे अन्य प्रोजेक्ट में समायोजित कर देंगे। मेटलिंग लेयर अनिवार्य “100 मीटर लंबी और 3.75 मीटर चौड़ी सड़क बनाने में करीब 4 लाख रुपए लगते हैं। पेचवर्क में 2 लाख का खर्च आता है। डामर से पहले मेटलिंग लेयर व बाद में सीलकोट अनिवार्य है। डामर पर रोलर नहीं चलाने से सड़क दो या तीन दिन में टूट जाएगी।” एक्सपर्ट व्यू - ताराचंद जाटोल, सेवानिवृत एसीई