भास्कर न्यूज | वनस्थली वनस्थली विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग की ओर से जनजातीय गौरव दिवस-2026 के अवसर पर जनजातीय जीवनशैली, पारिस्थितिक ज्ञान, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्होंने जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं, प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को समझा। कार्यशाला की मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग की प्रो. अर्चना कौशिक रहीं। मुख्य अतिथि वनस्थली विद्यापीठ के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एवं फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सृष्टि शास्त्री रहीं। सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन एवं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. हितेंद्र सिंह राठौर ने जनजातीय कला, संस्कृति को प्रोत्साहन देने के प्रति विद्यापीठ की प्रतिबद्धता जताई। कार्यशाला में 'वर्ड क्लाउड' गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों ने जनजातीय समाज से जुड़े शब्दों, विचारों को साझा किया। 'एथ्नोमेडिसिन ट्रेजर हंट' में पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग होने वाले औषधीय पौधों की जानकारी दी गई। वहीं 'सेलिब्रेटिंग ट्राइबल आर्ट' गतिविधि में गोंड, भील, वारली चित्रकला शैलियों के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति, रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रदर्शित किया गया। कार्यशाला में जनजातीय समाज के इतिहास, सामाजिक चुनौतियों, पारंपरिक ज्ञान, विकास की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा हुई।