नगर निगम की हठधर्मी और वित्तीय कुप्रबंधन ने शहर की विकास रफ्तार रोक दी है। सूरसागर से फर्नीचर वाली रोड इसका जीवंत स्मारक है। करीब 3 महीने पहले सीसी रोड का निर्माण पूरा होने के बावजूद महज 5 फीट के एक टुकड़े के कारण सड़क बंद है। इस मामूली हिस्से के फेर में रोजाना 50 हजार लोग धूल फांकने और लंबे चक्कर काटने को मजबूर हैं। अंदरूनी पड़ताल में सामने आया कि निगम और ठेकेदारों के बीच भुगतान को लेकर ठन गई है। शहर के छोटे-बड़े विकास कार्यों का करीब 10 से 14 करोड़ रुपए बकाया है। कई ठेकेदारों के व्यक्तिगत बिल ही 1 करोड़ तक पहुंच चुके हैं। सूरसागर रोड पर पहले सीसी निर्माण होना था, लेकिन बाद में तकनीकी बदलाव कर लोहे का जाल रखने का निर्णय लिया गया। अब ठेकेदार का साफ स्टैंड है, “जब तक पिछला भुगतान नहीं, तब तक एक इंच काम नहीं।” हैरानी की बात यह है कि निगम आर्थिक तंगी का बहाना बना रहा है, जबकि आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं। हाल ही में यूडी टैक्स से 8 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है। साथ ही 12वें और 13वें वित्त आयोग का भारी-भरकम फंड भी खातों में पहुंच चुका है। सवाल यह है कि जब फंड मौजूद है, तो जनता को राहत देने के बजाय प्रशासन किसका इंतजार कर रहा है? क्या प्रशासन किसी विशेष इशारे का इंतजार कर रहा है? पहले था विरोध, अब सड़क पर फर्नीचर यहां सड़क के लेवल को लेकर कुछ लोगों ने विरोध किया था। जैसे-तैसे लोगों की समझाइश हुई और जाल रखने पर सहमति बनी। फिर भी सड़क चलने के लिए नहीं खोली गई तो अब फर्नीचर वालों ने फर्नीचर ही रोड पर रखना शुरू कर दिया है। 50 हजार लोग रोज भुगत रहे सजा यह महज एक सड़क नहीं, बल्कि शहर की लाइफलाइन सरीखी है। इस सड़क के सुचारू होने से शहर के मुख्य मार्ग का ट्रैफिक दबाव कम हो सकता है। इसके बंद होने से 50 हजार लोगों को रोजाना असुविधा हो रही है। सड़क के दोनों ओर बसे व्यापारियों का धंधा चौपट हो रहा है और उड़ती धूल लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। केईएम रोड, चौखूंटी की ओर जाने के लिए लोगों के ये शार्ट कट का रास्ता है मगर अभी पूरे जूनागढ़ का चक्कर काटकर लोगों को जाना पड़ रहा है। "ऐसा नहीं है। एक-दो दिन में काम शुरू हो जाएगा। जाल रखने पर सहमति बन गई है। जल्दी ही सड़क खोली जाएगी।" -चिराग गोयल, अधीक्षण ​अभियंता, नगर निगम