दिमाग की गंभीर बीमारियों में अब सिर्फ बीमारी की पहचान ही नहीं, बल्कि उससे मस्तिष्क के किस हिस्से को कितना नुकसान पहुंचा है, इसका करने में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मददगार बन रही है। MRI जैसी जांचों से मिलने वाली तस्वीरों और मेडिकल डेटा का विश्लेषण कर AI प्रभावित हिस्से की पहचान करने, बीमारी की गंभीरता समझने और इलाज की योजना बनाने में डॉक्टरों की मदद कर सकती है। इससे मिर्गी के मरीजों में दौरे की वजह से बनने वाले मस्तिष्क के हिस्से की पहचान और स्ट्रोक के बाद उपचार की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है। इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की ओर से जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘IANCON-2026’ में न्यूरोलॉजिस्टों ने दिमाग की बीमारियों के इलाज में AI की बढ़ती भूमिका पर मंथन किया। उपचार की प्रक्रिया को सटीक बनाने में मिल सकती है मदद गोवा की डॉ. पारुल, कोलकाता की डॉ. मधुपर्णा कॉल और फरीदकोट की डॉ. सुलेना ने बताया कि AI आधारित तकनीक न्यूरोलॉजी में जांच और उपचार की प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने में मदद कर सकती है। एम्स दिल्ली और निमहांस जैसे संस्थानों में भी इस क्षेत्र में AI के इस्तेमाल पर काम हो रहा है। आयोजन अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा व सचिव डॉ. भावना शर्मा ने बताया कि स्ट्रोक के मामलों में दिमाग के प्रभावित क्षेत्र और नुकसान की सीमा का आंकलन करने में AI मदद कर सकती है। अल्जाइमर्स, पार्किंसन और डिमेंशिया जैसी बीमारियों में भी मेडिकल इमेजिंग और मरीजों के डेटा का विश्लेषण बीमारी के आंकलन में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, AI डॉक्टरों की विशेषज्ञता और क्लिनिकल जांच का विकल्प नहीं, बल्कि निर्णय लेने में सहायक तकनीक है। MRI से प्रभावित हिस्से की पहचान आयोजन कोषाध्यक्ष डॉ. दीपक जैन के अनुसार कॉन्फ्रेंस में न्यूरोलॉजी के भविष्य और नई उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। वर्ष 2035 से 2047 तक इस क्षेत्र में संभावित बदलावों, तकनीकी नवाचारों और उपचार की नई दिशाओं पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। मिर्गी के मरीजों की MRI जांच में AI की मदद से मस्तिष्क के उस हिस्से की पहचान करने में सहायता मिल सकती है, जहां से दौरे शुरू होते हैं।