अलवर शहर में घंटाघर व होपसर्कस के चारों तरफ सड़क पर लगी दीए, मोमबत्ती और सजावटी सामान की दुकानों को सोमवार को हटाया गया था। प्रशासन की करीब 10 घंटे की कार्रवाई के दौरान दुकानदार महिलाओं, बुजुर्गों से लेकर उनके छोटे-छोटे बच्चे तक रोते-बिलखते रहे। बुजुर्ग महिला रोते हुए बोलीं- प्रशासन के कहने पर कंपनी बाग में दुकान लगाकर देख लिया। वहां सामान नहीं बिका। सुबह से भूखे-प्यासे है। रोटी तक नसीब नहीं हुई। वे हाथ जोड़कर बोलीं- गरीब आदमी हूं, मत मारो-मत मारो। एक अन्य दुकानदार महिला ने कहा कि- हमारे बच्चे भूखे है। यहां राजा-महाराजा के टाइम से दुकानें लगती आ रही है। हमारी सुनवाई नहीं हो रही है। इस बीच 10 साल का एक बच्चा भी बिलख पड़ा। उसने कहा कि हमने चोरी नहीं की, हमारा परिवार सामान ही तो बेच रहा है। कार्रवाई के दौरान मिन्नत करते दुकानदारों की देखिए PHOTOS रोते हुए बोले- गरीबों के पेट पर लात मत मारो नगर निगम, यूआईटी और पुलिस टीम दुकानदारों का सामान हटा रही थी। तब 10 साल के बच्चे से लेकर 80 साल की बूढ़ी मां की आंखों से आंसू टपकने लगे। प्रशासन ने उन्हें समझाया कि उनके लिए कंपनी बाग में व्यवस्था की गई है। इस पर वे कहने लगे कि कर्ज पर सामान लेकर आए हैं। नई जगह बिक्री नहीं हुई तो भूखे रहना पड़ेगा। 10 साल का बच्चा रोते-रोते बोला कि हमने किसी की चोरी नहीं की है। मेहनत करके खा रहे हैं। फिर भी गरीब के पेट पर लात मार रहे हैं। ये पुलिस आकर दुकानें हटा रही है। ये हमारी तरह गरीब होते तो इनको भी गिड़गिड़ाना पड़ता। हर किसी का समय आता है। भाई को रोता देख 7 साल की बहन उसे चुप कराती रही। बुजुर्ग बोलीं- रोटी भी नहीं खाई, कंपनी बाग में सामान नहीं बिका करीब 80 साल की बूढ़ी मां भगोती पुलिस के सामने दोनों हाथ जोड़कर घबराते हुए बोली…. अरे गरीब आदमी हूं, मत मारो-मत मारो,मैं खुद हटा लूंगी दुकान। बोली-तुम गरीब की आत्मा को सता रहे हो। गरीबों की गर्दन काटने का काम कर रहे हो। हमने दो दिन कंपनी बाग के सामने दुकान लगा ली। एक रुपया की बिक्री नहीं हुई। पूरे दिन से रोटी भी नहीं खाई। राजा-महाराजा के समय से दुकान लगाते आ रहे स्वर्ग रोड की महिला सोमवती ने कहा कि सुबह से भूखे प्यासे हैं। पुलिस ने पानी तक नहीं पीने दिया। हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं। हमें तो माल के पैसे दे दो और तुम ही पूरा सामान ले जाओ। यहां होपसर्कस व घंटाघर पर हम राजा-महाराजा के समय से दुकान लगाते आ रहे हैं। दूसरी महिला ने कहा कि 5 दिन की मोहलत मांगी है। हमने 10 रुपए सैकड़ा में ब्याज पर पैसे लेकर सामान लेकर आए हैं। कंपनी बाग में दिन में 10 रुपए नहीं कमाए। इस कारण वापस होपसर्कस व घंटाघर पर दुकान लगाई हैं। लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।