अलवर में इस बार प्याज की शुरुआती फसल किसानों को अच्छा भाव दे रही है। मंडी में प्याज के भाव 1300 से 1700 रुपए प्रति मण (कट्टा) तक मिल रहे हैं। पिछले साल प्याज के दाम कम रहने से किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में इस बार अच्छे भाव मिलने से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। हालांकि, किसानों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। पिछेती प्याज की फसल में रोग लगने और सफेदी आने की आशंका बनी हुई है। इससे उत्पादन प्रभावित होने का डर है। फिलहाल अलवर मंडी में प्रतिदिन करीब 20 हजार कट्टे प्याज की आवक हो रही है। प्याज व्यापारी सौरभ कालरा के अनुसार पिछले दिनों बारिश के कारण मंडी में प्याज की आवक धीमी हो गई थी। अब धीरे-धीरे आवक बढ़ रही है। अनुमान है कि दीपावली के बाद मंडी में प्रतिदिन प्याज की आवक 50 हजार कट्टों के पार पहुंच सकती है। व्यापारी कालरा के अनुसार अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई बारिश से प्याज की ग्रोथ प्रभावित होने की आशंका है। कई जगह फसल में रोग और सफेदी की शिकायत भी सामने आ रही है। इससे करीब 20 से 25 प्रतिशत प्याज खराब होने की आशंका जताई जा रही है। इधर, पृथ्वीपुरा निवासी किसान बहादुर सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब 4 से 5 बीघा में प्याज की बुवाई की है। एक बीघा में करीब 70 हजार रुपए की लागत आई है। बीज खरीदने और अन्य खर्चों के कारण लागत बढ़ गई है। उनका कहना है कि इस बार प्याज के भाव तो अच्छे मिल रहे हैं, लेकिन मजदूरी और अन्य खर्च निकल सकते है। इस बार शुरुआती फसल से किसानों को अच्छे भाव की उम्मीद है, लेकिन पिछेती फसल में रोग लगने की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।