अलवर की उमरैण पंचायत समिति की सावड़ी ग्राम पंचायत में 30 अक्टूबर को पंच-सरपंच के चुनाव नहीं हो सके। वजह- लेट होने के कारण एक प्रत्याशी का नामांकन फॉर्म रिजेक्ट कर दिया गया था। इस पर वह बेहोश होकर गिर गए थे। इसके बाद सरपंच और वार्ड पंच के अन्य सभी प्रत्याशियों ने भाईचारा निभाते हुए अपने नामांकन वापस ले लिए थे। इनमें 4 सरपंच प्रत्याशी और 9 वार्ड पंच उम्मीदवार थे। सरपंच पद के प्रत्याशी जितेंद्र सिंह नट ने बताया- मैंने पंचायत से मिला फॉर्म भरकर 29 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किया था। लेकिन आरओ (रिटर्निंग ऑफिसर) ने ऑब्जेक्शन लगाया कि इसकी नोटरी नहीं हुई है। इसके बाद मैं तुरंत शहर गया। तहसील से नोटरी करवाकर ग्राम पंचायत पहुंचा तो आरओ ने कहा कि अब समय निकल गया है। उन्होंने मेरा नॉमिनेशन फॉर्म नहीं लिया। मैं ऑफिस से बाहर आया तो चक्कर खाकर बेहोश हो गया। लोगों ने मुझे उठाया और दिलासा दिया। इसके बाद सभी सरपंच और वार्ड पंच प्रत्याशियों ने अपने नामांकन फॉर्म वापस ले लिए। विरोधी प्रत्याशी ने कहा- सभी साथ में चुनाव लड़ेंगे, वरना नहीं लड़ेंगे जितेंद्र सिंह के बेहोश होने के बाद ग्राम पंचायत के लोगों ने उन्हें उठाया और कहा कि घबराओ मत, हम प्रशासन से बात करेंगे। आरओ से बात की गई, लेकिन जितेंद्र का नामांकन पत्र जमा नहीं किया गया। ग्रामीणों सहित उनके सामने सरपंच का चुनाव लड़ रहे महेंद्र जाटव और विजय जाटव ने पंचायत बुलाई। इसमें सभी लोगों ने आपस में बातचीत की। इस दौरान महेंद्र और विजय ने कहा- जब जितेंद्र चुनाव नहीं लड़ेंगे तो हम भी नहीं लड़ेंगे। हम चुनाव लड़ेंगे तो सभी साथ लड़ेंगे, वरना नहीं लड़ेंगे, चाहे कोई जीते या हारे। महेंद्र और विजय की पत्नी ने भी सरपंच पद के लिए नामांकन किया था। उन्होंने भी अपना नाम वापस ले लिया। चुनाव आते-जाते रहते हैं, भाईचारा खत्म नहीं होना चाहिए सरपंच प्रत्याशी महेंद्र जाटव ने कहा- जब जितेंद्र सिंह टेंशन में आ गए थे तो ग्रामीणों ने पंचायत में फैसला लिया, जिसका हमने समर्थन किया। हम आपस में भाईचारा रखते हैं। चुनाव आते-जाते रहते हैं। चुनाव दोबारा होंगे तो फिर मेहनत करेंगे। हार और जीत तो ईश्वर के हाथ में है। विजय जाटव ने कहा- पूरे गांव ने इसी बात को लेकर सहमति बनाई थी, इसलिए हम तुरंत तैयार हो गए। चुनाव तीनों साथ ही लड़ेंगे। वहीं पंच प्रत्याशी शोएब ने कहा- एक प्रत्याशी का फॉर्म रिजेक्ट होने से फायदा तो होता है, लेकिन इससे भाईचारे की मिसाल हमेशा के लिए खत्म हो जाती। अगर हम यह फैसला नहीं लेते तो नट समाज में यह बात हो जाती कि इन लोगों ने जानबूझकर फॉर्म रिजेक्ट करवाया है। एक का फॉर्म रिजेक्ट तो बाकी प्रत्याशियों ने नाम वापस लिया रिटर्निंग अधिकारी शिवचरण ने बताया- हमारे पास सरपंच पद के लिए 5 और वार्ड पंच के लिए 9 प्रत्याशियों के फॉर्म आए थे। इनमें से एक सरपंच प्रत्याशी जितेंद्र उर्फ जीत नट के फॉर्म में कमी होने के कारण रिजेक्ट कर दिया गया। इसके बाद सरपंच पद के सभी प्रत्याशियों महेंद्र जाटव, मिथलेश देवी, विजय जाटव और ललिता देवी ने नामांकन वापस ले लिए। हमने समझाइश भी की, लेकिन नहीं माने। वोटर बोले- एक भाई चुनाव नहीं लड़ रहा तो बाकी कैसे लड़ सकते हैं वोटर मुस्ताक शाह ने कहा- हमारे पूरे क्षेत्र में इस बात की चर्चा हो रही है। यहां पंचायत के सभी लोगों ने भाईचारे की मिसाल दी है कि एक भाई चुनाव नहीं लड़ पा रहा है तो दो कैसे लड़ सकते हैं। इन्होंने आपस में भाईचारा दिखाया है। वहीं स्थानीय निवासी शहजाद ने बताया- सावड़ी में पहली बार नट जाति का कोई व्यक्ति सरपंच पद का चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरा था। इससे पहले इस जाति से किसी ने चुनाव नहीं लड़ा था। जब वे चुनाव में उतरे तो उनका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हम खुश हैं कि सभी ने भाईचारा दिखाया। जब दोबारा चुनाव होंगे तो जितेंद्र सिंह को फिर से चुनाव लड़वाएंगे। ये खबर भी पढ़िए… पूर्व सरपंच बोले-चुनाव में पहले से तय हैं किसे हराना-जिताना:प्रशासन मिला हुआ हैं, कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट जाएंगे राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 के 2 चरणों में वोटिंग को लेकर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। पूर्व सरंपच और सरपंच प्रत्याशियों का कहना है कि चुनाव में पहले ही कर्मचारियों ने तय कर लिया है कि किसे हराना और जिताना है। पूरी खबर पढ़िए