भास्कर संवाददाता | चूरू राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर एपिलेप्सी केयर एंड रिसर्च फाउंडेशन की ओर से मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए मिर्गी जागरूकता व्याख्यान व प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मुख्य न्यूरोफिजिशियन डॉ. आरके सुरेका ने मिर्गी के कारणों, उपचार, प्रचलित भ्रांतियों और दौरे के समय दी जाने वाली प्राथमिक सहायता के बारे में जानकारी दी। डॉ. सुरेका ने बताया कि मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ी सामान्य चिकित्सकीय स्थिति है। यह न तो छुआछूत की बीमारी है और न ही किसी अलौकिक शक्ति का प्रभाव। झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में रहने से उपचार में देरी हो सकती है। नियमित दवाओं, उचित परामर्श और पारिवारिक सहयोग से मरीज पूरी तरह सामान्य व सक्रिय जीवन जी सकते हैं। दौरा आने पर शांत रहें। मरीज को जबरन बिल्कुल न पकड़ें, उनके मुंह में चम्मच या कोई अन्य वस्तु न डालें। पूरी तरह होश आने तक उन्हें पानी, भोजन या दवा न दें। यदि दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक चले, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। मिर्गी से पीड़ित बच्चों को शिक्षा, खेलकूद और सामाजिक अवसरों से वंचित करने के बजाय उनकी जरूरतों के अनुसार उन्हें सुरक्षा और सहयोग प्रदान किया जाना चाहिए। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. रमाकांत वर्मा, उप प्राचार्य दयानंद बुडानिया और एएनएम ट्रेनिंग सेंटर प्राचार्य बजरंग हर्षवाल ने भी विचार व्यक्त किए। प्रदर्शनी में मिर्गी के कारणों, लक्षणों, भ्रांतियों और उपचार के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया। संचालन डॉ. एफ.एच. गौरी ने किया। शिविर में 507 रोगी हुए लाभान्वित : रतननगर में मंगलवार को निशुल्क मिर्गी निदान शिविर लगाया गया। त्रिवेणी देवी सुरेका चेरिटेबल ट्रस्ट व एपिलेप्सी केयर एंड रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से लगे शिविर में 507 रोगी लाभान्वित हुए। इस दौरान डॉ. जयसिंह, डॉ. अभिनव सरीन और डॉ. रोहित सुरेका ने सहयोग किया।