डीग–गोवर्धन अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत बहज, जो ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का प्रमुख पड़ाव स्थल माना जाता है, इन दिनों भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई को लेकर चर्चा में है। गांव का प्राचीन नाम ब्रजनाभ (भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र) के नाम पर ‘बज नगर’ बताया जाता है, जिसे करीब 4000 से 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता से जोड़ा जा रहा है। 10 जनवरी 2024 से शुरू हुई खुदाई में अब तक 3500 से 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता के कई महत्वपूर्ण अवशेष सामने आए हैं, जिससे क्षेत्र का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व और अधिक बढ़ गया है। यह स्थल ब्रज क्षेत्र में स्थित होने के साथ-साथ पौराणिक सरस्वती नदी के प्राचीन सूखे मार्ग से भी जुड़ा माना जा रहा है। लोक कलाकारों ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान बहज गांव के लोक कलाकारों विजय कटीला, विष्णु शर्मा, बबलू ब्रजवासी और अशोक शर्मा ने ब्रज फोक गीत, फूलों की होली, चरकुला नृत्य, मयूर नृत्य और महारास जैसे कार्यक्रमों का देश-विदेश में प्रदर्शन किया है। इन कलाकारों ने म्यांमार और दक्षिण कोरिया सहित विभिन्न देशों में प्रस्तुतियां देकर गांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। बहज में मिली संरचनाएं विकसित सभ्यता के संकेत विशेषज्ञों के अनुसार बहज में मिली संरचनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि यहां एक सुव्यवस्थित और समृद्ध सभ्यता निवास करती थी। जल प्रबंधन, आवास निर्माण और धार्मिक परंपराओं के प्रमाण इस स्थल को एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं। साहित्यकार मुन्ना लाल ने कहा कि पुरातत्व विभाग की इस खोज के बाद बहज गांव में पर्यटन और शोध की अपार संभावनाएं बढ़ गई हैं। यदि इस स्थल का सही संरक्षण और विकास किया जाए तो यह प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। 800 से अधिक पुरावशेष, यज्ञकुंड और प्राचीन संरचनाएं मिलीं खुदाई के दौरान अब तक 800 से अधिक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं। इनमें मिट्टी के बर्तन, आभूषण, उपकरण, हड्डियों के औजार, ब्राह्मी लिपि की मोहरें, पंचमार्क सिक्के तथा धार्मिक गतिविधियों से जुड़े अवशेष शामिल हैं। इसके अलावा यज्ञकुंड, प्राचीन दीवारें और आवासीय संरचनाओं के प्रमाण भी मिले हैं, जो उस समय के विकसित सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की झलक देते हैं। पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या – लगभग 13,000 मुख्यालय से दूरी – 5 किमी साक्षरता – 90 प्रतिशत आजीविका – कृषि एवं पशुपालन आवागमन के साधन – रोडवेज बस, रेल एवं निजी वाहन