राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 के 2 चरणों में वोटिंग को लेकर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। पूर्व सरंपच और सरपंच प्रत्याशियों का कहना है कि चुनाव में पहले ही कर्मचारियों ने तय कर लिया है कि किसे हराना और जिताना है। प्रशासन मिला हुआ है, इसलिए गड़बड़ियां की जा रही है। अगर कार्रवाई नहीं की गई तो कोर्ट जाएंगें। दरअसल, भीलवाड़ा कलेक्ट्रेट पर सोमवार को बड़ी संख्या में पूर्व सरपंच, सरपंच प्रत्याशी और ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। कहा- पंचायती राज चुनाव के नतीजों में वोटों की गिनती में गड़बड़ी कर पोलिंग बूथ पर तैनात कर्मचारी चहेते प्रत्याशियों को जिता रहे हैं, जो गलत हैं। उन्होंने चुनाव निरस्त कर फिर से मतदान कराने की मांग की है। प्रदर्शन में पांसल, धूलखेड़ा (सुवाणा), लुहारिया (मांडल) और बेरां (बनेड़ा) ग्राम पंचायत के सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। जीते हुए प्रत्याशियों को रिकाउंटिंग में हराने का आरोप पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष धनराज गुर्जर ने कहा कि प्रशासन और पोलिंग पार्टियों ने जिले में पूर्व नियोजित साजिश के तहत काम किया गया है। किसे हराना है और किसे जिताना है, यह पहले ही तय कर लिया गया था। धूलखेड़ा के सरपंच प्रत्याशी गोपाल गुर्जर ने कहा- मतगणना के दौरान उन्हें पहले 218 वोटों से विजयी घोषित किया गया, लेकिन बाद में रिकाउंटिंग कराकर 65 वोटों से हरा दिया गया। मतगणना के समय प्रत्याशियों को दूर रखा गया और मतपत्र तक नहीं दिखाए गए। पांसल के पूर्व सरपंच छोटू जाट ने आरोप लगाया कि चुनाव अधिकारी ने रिकाउंटिंग से साफ इनकार कर दिया और अगले ही दिन सोशल मीडिया पर जले हुए बैलेट पेपर का वीडियो सामने आया, जिससे पता लगता है कि चुनाव में फर्जीवाड़ा हुआ है। राजनीतिक दबाव और फर्जी मतदान का आरोप लुहारिया पंचायत से सरपंच प्रत्याशी मुस्तफा खान पठान ने कहा कि यह सब राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है। पठान और ग्रामीणों ने कहा कि नवनिर्वाचित सरपंच को किसी भी हाल में पदभार ग्रहण न करने दिया जाए और निष्पक्ष जांच कराकर लुहारिया में चुनाव निरस्त कर फिर से वोटिंग होनी चाहिए। वहीं बेरां के सुखदेव शर्मा और उपरेड़ा की सरोज कंवर सहित विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भी निर्वाचन विभाग के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की।