महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रचेता के पद पर कार्यरत विजयलक्ष्मी जोशी शनिवार को रिटायर हो गईं। बीकानेर में 32 साल 18 दिन की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद रिटायरमेंट के मौके पर वे दिवंगत पति को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने दिवंगत पति को याद करते हुए कहा- ‘अगर वे नहीं होते तो शायद आज मेरी यह नौकरी भी नहीं होती। वे हमेशा मेरे साथ रहे। गांव-गांव, ढाणी-ढाणी मेरे साथ चले। हर मुश्किल में मेरा हौसला बने, हर परेशानी से लड़े और हर परिस्थिति में मेरे लिए मजबूती से खड़े रहे। मेरी इस पूरी यात्रा में उनका योगदान सबसे बड़ा रहा है। आज मैं जिस मुकाम पर पहुंची हूं, उसमें उनकी मेहनत, उनका विश्वास और उनका साथ शामिल है।’ सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया में बनी सहभागी विजयलक्ष्मी जोशी ने सेवाकाल के दौरान अनेक पीढ़ियों के साथ काम किया। वे अनगिनत परिवारों से जुड़ीं, महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया में भी अपना योगदान दिया। उनका कार्यक्षेत्र केवल ऑफिस की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा। गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक पहुंचकर आंगनबाड़ी केंद्रों, आशा सहयोगिनियों और विभागीय साथियों के साथ समन्वय बनाना, उन्हें काम के प्रति प्रेरित रखना और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना उनके कार्यशैली रही। हालांकि कई बार सामाजिक परिस्थितियां और पारिवारिक दबाव महिलाओं के काम करने की राह में बाधा बनते थे। ऐसे में उन्हें समझाना, उनके परिवारों का विश्वास जीतना और उनके पतियों व घरवालों को भी महिलाओं के कार्य के लिए प्रोत्साहित करना आसान नहीं था। लेकिन विजयलक्ष्मी ने धैर्य, संवाद और अपने व्यवहार से इन चुनौतियों का सामना किया। उनके लिए यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि महिलाओं को उनके दायित्वों और सामर्थ्य का एहसास कराने का मिशन था। मुश्किलों के बाद भी नहीं छोड़ा कर्तव्य का रास्ता जनवरी 2025 में विजयलक्ष्मी के पति सुरेंद्र कुमार जोशी का निधन हो गया। इसके बाद गंभीर हृदय संबंधी समस्या भी उनके सामने आई और जांच में हृदय की धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज पाए गए। इसके बाद गुरुग्राम में उनकी जटिल बायपास सर्जरी हुई। लेकिन विजयलक्ष्मी ने हिम्मत नहीं हारी। स्वास्थ्य लाभ के बाद उन्होंने फिर से ड्यूटी जॉइन की और जिम्मेदारियों को संभालते हुए रिटायरमेंट के अंतिम कार्यदिवस तक वे ऑफिशियल काम करती रहीं। प्रशासन ने भी किया सम्मानित जिले में पदस्थ रहे लगभग सभी कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी उनके काम को सराहा हैं। प्रचेता के पद पर रहते हुए अपनी कार्यक्षमता, फील्ड की समझ और विभागीय योजनाओं के प्रति प्रतिबद्धता से विशेष पहचान बनाई। जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने के प्रयासों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। इस मौके पर अनेक बार प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया गया।