सूफी संगीत की रूहानी शायरी, दमदार आवाज और आधुनिक संगीत की ऊर्जा को जयपुर में सूफी सिंगर बिस्मिल पेश करते दिखेंगे। ‘बिस्मिल की महफिल’ कॉन्सर्ट 14 नवंबर को जयपुर में होगा। जी लाइव के सुपरमून की ओर से आयोजित यह लाइव शो सीतापुरा स्थित जी स्टूडियोज में होगा। ‘बिस्मिल की महफिल’ में सूफी संगीत के साथ आज के संगीत संयोजन और लाइव कॉन्सर्ट का जोश देखने को मिलेगा। बिस्मिल की प्रस्तुति में शायरी, गायकी और दर्शकों के साथ संवाद को खास जगह मिलती है। जयपुर के बाद ‘बिस्मिल की महफिल’ का इंडिया टूर 28 नवंबर को हैदराबाद, 24 दिसंबर को इंदौर और 16 जनवरी 2027 को अहमदाबाद पहुंचेगा। मुंबई और दिल्ली में शो की तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा। बिस्मिल बोले- पिंकसिटी में परफॉर्म करने को उत्साहित हूं जी लाइव के बिजनेस हेड गैरेथ इस्विन थॉमस ने कहा कि सूफी संगीत की गहराई और हर पीढ़ी के दर्शकों से जुड़ने की क्षमता का जश्न मनाने के लिए यह शो जयपुर लाया जा रहा है। जयपुर की सांस्कृतिक विरासत समृद्ध है और यहां कला की कद्र करने वाले दर्शक हैं। आयोजन के जरिए ऐसी शाम रचने की कोशिश है, जिसमें लोग शायरी, संगीत और सामूहिक ऊर्जा को महसूस कर सकें। बिस्मिल ने कहा कि हर शहर की अपनी ऊर्जा होती है और पिंक सिटी में एक खास कशिश है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए महफिल का मतलब संगीत, शायरी और दर्शकों के बीच का रिश्ता है। यहां परफॉर्म करने को लेकर काफी उत्साहित हूं। अभी जयपुर में पिछले दिनों भी परफॉर्म किया था और यहां से खूब सारा प्यार मिला था। शास्त्रीय तालीम से सूफी-फ्यूजन तक का सफर बिस्मिल का असली नाम मोहम्मद आसिफ है। उन्होंने पांच साल की उम्र से संगीत सीखना शुरू किया और दिल्ली व मुरादाबाद घरानों के उस्तादों से तालीम ली। शास्त्रीय संगीत की बुनियाद और सूफी गायकी की भावनात्मक अभिव्यक्ति उनके अंदाज की खास पहचान है। उन्होंने पारंपरिक कव्वाली और सूफी रचनाओं को आधुनिक संगीत संयोजन के साथ पेश कर नई पीढ़ी के श्रोताओं तक पहुंचाने की कोशिश की है। उनकी पहचान बनाने वाले गीतों में ‘की किता’, ‘काली काली जुल्फों के फंदे’ और ‘कहना गलत गलत’ शामिल हैं। ‘काली काली जुल्फों के फंदे’ नुसरत फतेह अली खान की मशहूर कव्वाली का उनका संस्करण है, जिसे ऑनलाइन काफी लोकप्रियता मिली।