पंचायत चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ पार्टियों और प्रत्याशियों के बीच नहीं है। कई सीटों पर एक ही परिवार के सदस्य भी चुनावी मैदान में हैं। कहीं देवरानी-जेठानी आमने-सामने हैं, तो कहीं मां और दो बेटे अलग-अलग वार्डों से किस्मत आजमा रहे हैं। पति-पत्नी को भी अलग-अलग सीटों से टिकट मिले हैं। इससे परिवारों की राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। पति-पत्नी और मां-बेटे जैसे रिश्तों में बंधे प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों में सरपंच बनने की दौड़ में एक ही परिवार के दो से ज्यादा लोग आमने-सामने मैदान में डटे हुए है। पंचायती के लिए मैदान में देवरानी-जेठानी : झुंझुनूं जिला परिषद में भाजपा ने देवरानी व जेठानी को चुनावी मैदान में उतारा है। वार्ड 5 से जेठानी हर्षिनी कुल्हरी भाजपा प्रत्याशी है, वहीं देवरानी अनामिका पुनिया वार्ड 26 से भाजपा की उम्मीदवार है। बीकानेर के बज्जू पंचायत समिति के वार्ड एक में भाजपा की नख्तू देवी चंदेल और कांग्रेस की रामप्यारी चंदेल आमने-सामने हैं। दोनों सगी देवरानी-जेठानी हैं। वहीं नागौर के बरणगांव पंचायत में सरपंच का चुनाव लड़ने वाली राजबाला व मीरादेवी देवरानी- जेठानी है। पति-पत्नी दोनों का शक्ति-प्रदर्शन चूरू जिला परिषद में कांग्रेस व भाजपा ने एक-एक जोड़ा चुनावी मैदान में उतारा है। भाजपा ने पति पराक्रम राठौड़ और उनकी पत्नी कनिका सिंह को अलग वार्ड से प्रत्याशी बनाया है। पराक्रम राठौड़ भाजपा के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ के बेटे है। वहीं कांग्रेस ने केशरीचंद शर्मा और उनकी पत्नी अंजूबाला को भी अलग अलग वार्ड से मैदान में उतारा है। केशरीचंद पूर्व विधायक भंवरलाल शर्मा के बेटे है। जालोर जिला परिषद के वार्ड-30 से कांग्रेस के प्रदीप सिंह चौहान और पत्नी हेमंत कंवर जालोर पंचायत समिति के वार्ड-13 से उम्मीदवार हैं। बाड़मेर जिला परिषद के वार्ड 15 से कांग्रेस ने गफूर अहमद को टिकट दिया है, वहीं उनकी पत्नी शमा बानो भी धनाऊ पंचायत समिति से चुनाव लड़ रही है। चुनावी मैदान में मां और दो बेटे श्रीमाधोपुर पंचायत समिति में मां व दो बेटे चुनावी मैदान में थे। मतदान हो गया है और परिणाम आने बाकी है। यहां भाजपा ने मां शांति देवी को वार्ड 17 से और बेटे अजय सिंह खर्रा को वार्ड 20 से प्रत्याशी बनाया है। वहीं एक बेटा दुर्गा सिंह वार्ड 19 से निर्दलीय चुनाव लड़ा है। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार के चुनावी मैदान में होना सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है। टिकट से लेकर चुनाव प्रचार तक, परिवारों की दोहरी दावेदारी : पंचायत चुनाव में एक परिवार के सदस्यों का अलग-अलग सीटों से मैदान में उतरना स्थानीय राजनीति में परिवार की मौजूदगी को दिखाता है। वहीं एक से ज्यादा सदस्यों के मैदान में उतरने का मामला अब चर्चा में है।