सफाई के काम का भुगतान लेने पहुंचे ठेकेदार से विकास अधिकारी ने पहले रिश्वत का हिसाब तय किया। एक लाख रुपए मांगे तो ठेकेदार ने कहा- ‘साहब, कुछ कम कर लो, ज्यादा हैं।’ जवाब मिला- ‘ये तो सिस्टम है... आपकी इच्छा है तो काम कर लो, नहीं तो रहने दो। टेंडर कैंसिल करवा लो।’ आखिर दो सफाई ठेकों के 30-30 हजार रुपए पर बात तय हुई। विकास अधिकारी ने कहा- ‘डन है।’ इसके बाद हाथ के इशारे से पाइप लाइन की एमबी भरवाकर बिल पास कराने के लिए पांच हजार रुपए और मांगे।खैरथल-तिजारा जिले की मुण्डावर पंचायत समिति में 65 हजार रुपए की रिश्वत के मामले में एसीबी की दर्ज एफआईआर में यह पूरी बातचीत सामने आई है। आरोप है कि विकास अधिकारी संजय कुमार यादव के कहने पर रिश्वत की रकम कनिष्ठ सहायक रितिक कुमार सिंह की रैक में रखवाई गई। एसीबी ने दोनों को गिरफ्तार किया है। पहले कहा- पैसे नहीं दिए तो बिल पास नहीं होंगे शिकायतकर्ता अमनदीप की फर्म को नगंली ओझा और मातौर पंचायत में सफाई के ठेके मिले थे। फर्म ने पाइपलाइन का काम भी किया था। शिकायत के अनुसार, विकास अधिकारी ने 1 लाख रुपए मांगे। कहा कि रकम नहीं दी तो किए जा चुके काम और जुलाई तक होने वाले काम के बिल पास नहीं होंगे। टेंडर का काम जारी रखने और पाइप लाइन की माप पुस्तिका यानी एमबी भरवाने के लिए भी पैसे देने होंगे। बाद में बोला- न रिश्वत मांगी, ना देने को कहा पकड़े गए तो बोले- लिफाफे में क्या था, पता नहीं परिवादी का इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में रितिक ने कहा- ‘अमनदीप ने कहा था कि साहब ने कुछ सामान रखने के लिए कहा है। मैंने रैक में रखने को कहा। मुझे नहीं पता लिफाफे में क्या है।’ वहीं विकास अधिकारी ने कहा- ‘मैंने कोई रिश्वत नहीं मांगी और न किसी को पैसे देने के लिए कहा।’ पूछताछ के बाद एसीबी ने मल्लूवास, बानसूर, कोटपूतली-बहरोड़ निवासी विकास अधिकारी संजय कुमार यादव और मुण्डावर, खैरथल-तिजारा निवासी कनिष्ठ सहायक रितिक कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया।