उत्तराखंड में चारधाम की चार्टर हेली सेवाओं पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है। 11 हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों के दो पायलट अनिवार्य करने के नियम के विरोध के बाद यह फैसला लिया गया है। सोमवार को उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के बीच हुई बैठक में तय किया गया कि चार्टर हेली सेवाएं अब अगले सीजन में ही शुरू होंगी। हालांकि, केदारनाथ में शटल हेली सेवा जारी रहेगी। UCADA के CEO प्रतीक जैन ने बताया कि इस सीजन में चार्टर हेली सेवाओं की ज्यादा बुकिंग नहीं हुई थी। जिन यात्रियों ने बुकिंग कराई थी, उन्हें पूरा पैसा रिफंड किया जाएगा। हल्द्वानी में CM धामी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हादसे के लिए जो भी दोषी होगा उस पर सख्त एक्शन लेंगे। चालू यात्रा के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए, हमने अभी से अगले साल की यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 10 नवंबर बंद होंगे गंगोत्री के कपाट केदारनाथ में सामान्य शटल हेली सेवाओं का संचालन जारी है। यहां DGCA ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) का कंट्रोल रूम बनाया है। यहां से मौसम और उड़ानों की पल-पल की जानकारी के आधार पर हेलिकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति दी जा रही है। हालांकि, नए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं होने के कारण लंबी दूरी की पर्सनल चार्टर सेवाएं बंद हैं। वहीं, गंगोत्री के कपाट 10 नवंबर, केदारनाथ और यमुनोत्री के 11 नवंबर, जबकि बद्रीनाथ के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे। इसके साथ ही चारों धामों में इस साल की ग्रीष्मकालीन यात्रा का समापन हो जाएगा। नियम लागू करने से पहले ऑपरेटरों से नहीं की चर्चा दरअसल, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने चार्टर हेलिकॉप्टर सेवाओं में दो पायलट अनिवार्य करने समेत कई नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नियम 2 नवंबर से लागू होने थे। ऑपरेटरों ने 31 अक्टूबर को DGCA को सामूहिक लेटर भेजकर इन पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि हर उड़ान में दो पायलट रखने से उनकी नियुक्ति, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च बढ़ेगा। मौजूदा किराए पर इतनी लागत के साथ सेवाओं का संचालन आर्थिक रूप से संभव नहीं होगा। ऑपरेटरों ने कहा कि वे विमानन सुरक्षा और DGCA के नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हिमालय के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सुरक्षित उड़ान के लिए उन्होंने पहले भी संसाधन लगाए हैं। हालांकि, नए नियम लागू करने से पहले उनसे पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उनका कहना है कि सुरक्षा से जुड़े प्रावधान व्यावहारिक और आर्थिक रूप से टिकाऊ होने चाहिए। एसोसिएशन ने मौजूदा स्वरूप में दो पायलट अनिवार्य करने के नियम को स्वीकार करने से इनकार किया है। इसके चलते सभी 11 ऑपरेटरों ने 2 नवंबर से चारधाम चार्टर सेवाएं स्थगित करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने DGCA और UCADA से जल्द बैठक कर वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की मांग की है। हर उड़ान से पहले लेनी थी अनुमति नए दिशा-निर्देशों में दो पायलटों की अनिवार्यता के अलावा उड़ान की अनुमति लेने की प्रक्रिया भी सख्त की गई थी। इसके तहत चार्टर हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों को उड़ान भरने से पहले सहस्रधारा में तैनात UCADA के हेड ऑफ ऑपरेशंस से गंतव्य की मंजूरी लेनी थी। इसका उद्देश्य हेलिकॉप्टरों की आवाजाही पर निगरानी रखना और संचालन को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित करना था। चारधाम क्षेत्र में हेलिकॉप्टर संचालन की सुरक्षा को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया, जब शुक्रवार को चमोली के ज्योतिर्मठ में बद्रीनाथ से देहरादून आ रहा एक हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था। हादसे में पायलट समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी। 38 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रविवार सुबह सभी शव बरामद किए गए। इसके बाद शाम को शव एम्स ऋषिकेश से देहरादून एयरपोर्ट लाए गए। यहां से इंडिगो की फ्लाइट के जरिए उन्हें उनके घर भेजा गया।हेलिकॉप्टर ने शुक्रवार दोपहर करीब 1:14 बजे बद्रीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा के लिए उड़ान भरी थी। जोशीमठ घाटी के ऊपर उड़ान के दौरान उसका संपर्क टूट गया था।
सहस्रधारा से कितनी कंपनियां हेली सेवा देती हैं और उनके पास कितने हेलिकॉप्टर हैं? सहस्रधारा से चारधाम के लिए हेलिकॉप्टर सेवाएं मुख्य रूप से चार्टर ऑपरेशन के तहत संचालित होती हैं। DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सहस्रधारा से चारधाम के लिए 7 ऑपरेटर, कंसोर्टियम को चार्टर उड़ानें संचालित होती हैं। 1 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक 11 हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने दो पायलट अनिवार्य करने के नए नियम का विरोध करते हुए DGCA को पत्र दिया है। इनमें Himalayan Heli Services, Arrow Aircraft Sales and Charters, Kan Aerofoil, Indo Copters, Pilgrimage Aviation, Baramati Agro, Rajas Aerosports, Heritage Aviation, Thumby Aviation, United Helicharters और Chipsan Aviation शामिल हैं। केदारनाथ के लिए कितनी कंपनियां सेवाएं दे रही थीं और उनके पास कितने हेलिकॉप्टर थे? चारधाम यात्रा 2026 के लिए UCADA ने केदारनाथ हेली शटल सेवा के लिए 8 ऑपरेटरों का चयन किया था। इन्हें तीन हेलीपैड से उड़ान संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। ऑपरेटर्स की जानकारी। क्या को-पायलट होता तो दुर्घटना टाली जा सकती थी? 30 अक्टूबर को दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर में केवल एक पायलट और पांच यात्री सवार थे। विमानन मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह AS350B3 हेलिकॉप्टर था, जिसका रजिस्ट्रेशन VT-HCX था। को-पायलट होने के संभावित फायदे: अब DGCA ने क्या फैसला लिया? 31 अक्टूबर को DGCA और UCADA की बैठक के बाद चारधाम के चार्टर हेलिकॉप्टरों में दो पायलट अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया। दूसरा पायलट भी पहाड़ी क्षेत्र में उड़ान संचालन के लिए योग्य होना चाहिए। यह व्यवस्था 2 नवंबर से लागू करने के निर्देश दिए गए। 13 अक्टूबर 2026 की AAIB रिपोर्ट में 15 जून 2025 को केदारनाथ के पास हुए आर्यन एविएशन हादसे की जांच के बाद पहली बार घाटी में अकेले उड़ान संचालन से पहले अनुभवी पायलट के साथ कम से कम 50 घंटे की सुपरवाइज्ड हिल फ्लाइंग की सिफारिश की गई थी। यह दिखाता है कि पहाड़ी क्षेत्र में पायलट के अनुभव और प्रशिक्षण का मुद्दा पहले से जांच एजेंसियों के सामने था। खराब मौसम के बावजूद उड़ान भरी गई? कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? 31 अक्टूबर की रिपोर्ट में UCADA के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय टोलिया के हवाले से बताया गया कि: 30 अक्टूबर को खराब मौसम के कारण चारधाम रूट पर उड़ानें रोकने का आदेश दिया गया था। यह आदेश हादसे से करीब एक घंटे पहले जारी किया गया था। UCADA का आरोप है कि Trans Bharat Aviation ने इस आदेश के बावजूद उड़ान संचालित की। UCADA ने कहा कि आदेश की अवहेलना कैसे हुई, इसकी जांच की जा रही है। कंपनी के फ्लाइट ऑपरेशन डायरेक्टर एस. भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं थी। जांच में पुष्टि होना बाकी अभी यह स्थापित नहीं हुआ है कि कंपनी ने जानबूझकर सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन किया था। UCADA के आरोप और कंपनी का जवाब दोनों जांच के दायरे में हैं। कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? 10 साल में 13 हादसे, 27 मौतें हादसे की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी हादसे की जांच के निर्देश दिए थे। केंद्र सरकार के मुताबिक, 2016 से 2026 के बीच उत्तराखंड में 13 हेलिकॉप्टर हादसे हुए हैं। इनमें 27 लोगों की मौत हुई है। ऐसे में सुरक्षा नियमों को लेकर सरकार और ऑपरेटरों के बीच शुरू हुआ विवाद अब चारधाम क्षेत्र में हेलिकॉप्टर सेवाओं के संचालन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।