पीठ और गर्दन का दर्द अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की परेशानी नहीं रह गया है। 5 से 6 साल के बच्चे भी पीठ दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। 20 से 50 साल के वर्किंग प्रोफेशनल मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। SMS अस्पताल के अधीक्षक डॉ मृणाल जोशी का कहना है कि बैक पेन के केस कोविड के बाद ज्यादा बढ़े है। डॉक्टर इसकी बड़ी वजह घंटों मोबाइल-कंप्यूटर के सामने बैठना, गलत पोस्चर को मान रहे है। कई बच्चों में तो 14 साल की उम्र तक डिस्क प्रोलैप्स के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं बार-बार सीटी स्कैन, एक्स-रे करवाने से रेडिएशन बढ़ जाता है जिससे कैंसर का खतरा भी रहता है। शनिवार को अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज में बैक पेन सेमिनार में SMS अस्पताल जयपुर के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने कहा- पीठ-गर्दन दर्द के बढ़ते मामलों में जांचों, पेन किलर और लंबे समय तक बेड रेस्ट से इस तरह की दिक्कतें ज्यादा होती है। 5 साल के बच्चे को पीठ दर्द, 14 साल में डिस्क प्रोलैप्स, डॉ. मृणाल जोशी ने बताया कि पहले के समय में बच्चे मैदान में दौड़ते-भागते थे, लेकिन अब कम उम्र में ही पीठ दर्द की शिकायत लेकर ओपीडी पहुंच रहे हैं। 5 से 6 साल के बच्चे भी इससे परेशान हैं। छोटे बच्चों में दर्द की वजह कई बार सेप्टिक अर्थराइटिस या छिपा हुआ इन्फेक्शन हो सकता है। वहीं, बड़े बच्चों में घंटों मोबाइल देखना, ऑनलाइन क्लास और गलत पोस्चर के कारण मांसपेशियों में दर्द और डिस्क की समस्याएं बढ़ रही हैं। 14 साल के बच्चों में डिस्क प्रोलैप्स के मामले भी सामने आ रहे हैं। क्रिकेट, सितोलिया और दूसरे मैदानी खेलों से बच्चों ने दूर बना ली। पढ़ाई और परीक्षा का तनाव भी उनकी मानसिक स्थिति पर असर डाल रहा है। कई बच्चे दर्द के कारण स्कूल जाने से मना कर देते हैं, जबकि उनकी जांच रिपोर्ट सामान्य आती है। ऐसे मामलों में बच्चे से बातचीत करना और दर्द के पीछे की वजह समझना जरूरी है। SMS के अधीक्षक डॉ मृणाल जोशी के अनुसार, पीठ और गर्दन दर्द के मरीजों को उम्र के हिसाब से तीन वर्गों में देखा जा सकता है। कोविड के बाद से ज्यादा मरीज आ रहे डॉ जोशी ने कहा कि कोविड से पहले अस्पताल में पीठ-गर्दन दर्द से जुड़े मरीजों की ओपीडी करीब 250 से 300 प्रतिदिन थी। अब यह बढ़कर 450 से 500 मरीज रोजाना तक पहुंच गई है। एक जांच में 400 एक्स-रे के बराबर रेडिएशन डॉ. जोशी ने सरकारी योजनाओं में मुफ्त जांच की सुविधा मिलने से मरीज बार बार सीटी स्कैन और एक्स-रे करवाते है। उन्होंने कहा- एक सीटी स्कैन में करीब 400 सामान्य एक्स-रे के बराबर रेडिएशन हो सकता है। दो बार सीटी स्कैन कराने पर यह एक्सपोजर और बढ़ जाता है। बार-बार रेडिएशन के संपर्क में आने से लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक जांच से इलाज की दिशा बदलने की संभावना न हो या सर्जरी जैसा बड़ा फैसला लेना जरूरी न हो, तब तक बेवजह जांच कराने से बचना चाहिए। मरीज की क्लिनिकल जांच और डॉक्टर का अनुभव सबसे अहम है। जांच का फैसला मरीज की जरूरत के अनुसार होना चाहिए, न कि मुफ्त सुविधा मिलने के आधार पर। हर दर्द में पेन किलर लेने से बचें डॉ. जोशी ने कहा कि पीठ दर्द होने पर मेडिकल स्टोर से पेन किलर लेकर खाना या कई दिनों तक बिस्तर पर पड़े रहना सही तरीका नहीं है। दर्द की वजह मांसपेशियों का खिंचाव, डिस्क की समस्या या मानसिक तनाव भी हो सकती है। ऐसे में हर मरीज को एक ही दवा देना सही नहीं है। दर्द की वजह के अनुसार हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और सक्रिय दिनचर्या राहत देने में मददगार हो सकती है। फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा करें-डॉक्टर डॉ. जोशी ने बच्चों और वर्किंग प्रोफेशनल्स और बच्चों को दिनचर्या में बदलाव की सलाह दी। लगातार कई घंटे मोबाइल देखने से गर्दन और रीढ़ पर दबाव बढ़ता है। बच्चों को मैदान में खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। कंप्यूटर पर काम करने वालों को भी लंबे समय तक एक ही पोस्चर में बैठने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि दर्द की शिकायत को नजरअंदाज करना या खुद ही दवा लेना ठीक नहीं है। लगातार दर्द होने पर डॉक्टर से जांच कराएं। सही पोस्चर, नियमित वॉक, साइकिलिंग और जरूरत के अनुसार एक्सरसाइज से पीठ-गर्दन दर्द की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।