डीग के पूंछरी का लौठा गांव में अंधविश्वास के चलते समय पर इलाज नहीं मिलने से सांप के डसने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। सांप के डसन के बाद बच्चे की हालत बिगड़ती रही, लेकिन परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय करीब चार घंटे तक भोपाओं और बाबाओं के पास झाड़-फूंक करवाने के लिए भटकते रहे। बाद में स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क किया, लेकिन वहां भी गंभीर हालत में इलाज की सुविधा नहीं होने की बात सामने आई। आखिरकार बच्चे को भरतपुर ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। सांप के काटने के बाद आने लगे झटके मृतक की पहचान किरसू उर्फ कृष्णा पुत्र पिंटू के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 2 बजे सांप के डसेन के बाद कृष्णा की तबीयत बिगड़ने लगी और उसे झटके आने लगे। इसके बावजूद परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के लिए भोपाओं और बाबाओं के पास ले जाते रहे। करीब चार घंटे तक इसी तरह समय निकल गया। स्वास्थ्य केंद्र में भी नहीं मिला इलाज बच्चे की हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों ने पूंछरी सीएचसी में फोन कर इलाज के बारे में जानकारी ली। वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज संभव नहीं है। परिजन बच्चे को कुम्हेर समेत अन्य जगहों पर लेकर गए, लेकिन इलाज नहीं मिला। भरतपुर ले जाते समय रास्ते में मौत कृष्णा की हालत लगातार बिगड़ती गई। परिजन उसे इलाज के लिए भरतपुर लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। चिकित्सा व्यवस्था पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल में स्टाफ बदलने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग की। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद सौंपा शव सूचना मिलने पर पूंछरी का लौठा चौकी प्रभारी राजवीर सिंह और सदर थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति शांत कराई।