साइबर ठगी के मामलों में आमजन को अब दोहरी राहत मिल रही है। पहली, खाते से ठगी की रकम निकलने पर उसे वापस पाने के लिए पुलिस और कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। दूसरी, साइबर अपराधियों ने बिना जानकारी आपके खाते में ठगी का पैसा ट्रांसफर कर दिया और पुलिस ने खाता फ्रीज कर दिया तो उसे भी जांच के बाद खुलवाया जा सकेगा। इन परेशानियों से राहत दिलाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के आई4सी ने ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल (जीआरएम) और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) शुरू किए हैं। राजस्थान में पुलिस और बैंकों के रियल-टाइम तालमेल से संदिग्ध खातों में 134.43 करोड़ रुपए ब्लॉक किए गए हैं। वहीं, 11,175 पीड़ितों के 7.52 करोड़ रुपए लौटाने के आदेश जारी हुए हैं। दोनों पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में राजस्थान की स्थिति सुधरकर अब ग्रीन जोन में आ गई है। जीआरएम और एमआरएम की नियमित निगरानी पीएम प्रगति पोर्टल के जरिए भी की जाती है। जीआरएम : बिना जानकारी खाते में ठगी की रकम आई और खाता फ्रीज हुआ तो बैंक के जरिए शिकायत, जांच के बाद खुलेगा। सायबर अपराध के मामलों में किसी व्यक्ति के बैंक खाते में उसकी जानकारी के बिना ठगी की रकम आने पर साइबर शिकायत या लीन लगने से खाता फ्रीज हो सकता है। ऐसे में खाताधारक बैंक के जरिए जीआरएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवा सकता है। इसके बाद बैंक और जांच एजेंसी खाते की केवाईसी और ट्रांजेक्शन की जांच करते हैं। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर खाता अनफ्रीज किया जा सकता है। शिकायत खारिज होने पर राज्य स्तर पर अपील का विकल्प भी है। राजस्थान में डेबिट फ्रीज के 1478 अनुरोध मिले, जिनमें से 1073 का निस्तारण हो चुका है। इसके साथ ही संदिग्ध मामलों में 134.43 करोड़ रुपए ब्लॉक कर सुरक्षित किए गए हैं। एमआरएम : 50 हजार से कम की ठगी में कोर्ट आदेश का इंतजार नहीं, बैंक और पुलिस की जांच से रकम वापसी। पहले साइबर ठगी की रकम आरोपी के खाते में फ्रीज होने के बावजूद पीड़ित को उसे वापस पाने के लिए पुलिस और कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) के जरिए 50 हजार रुपए से कम के लेन-देन वाले मामलों में कोर्ट आदेश की अनिवार्यता खत्म की गई है। शिकायत मिलने पर संबंधित बैंक और जांच एजेंसी प्राथमिक जांच व सत्यापन कर रकम सीधे पीड़ित के मूल खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं। राजस्थान में 17,147 पीड़ितों ने 10.53 करोड़ रुपए वापस पाने के आवेदन किए थे। इनमें 11,175 पीड़ितों के 7.52 करोड़ रुपए लौटाने के आदेश जारी हो चुके हैं। राशि की बहाली का 71 प्रतिशत है और राजस्थान देश में 13वें स्थान पर है। बैंकों ने नोडल अफसर बढ़ाए, पुलिस ने साप्ताहिक समीक्षा और तकनीकी कार्मिकों की तैनाती की केंद्र सरकार के दोनों पोर्टल शुरू करने के बाद राजस्थान की स्थिति बेहतर करने के लिए पुलिस और बैंकों ने मिलकर कार्ययोजना बनाई। बैंकों ने नोडल अफसर बढ़ाए और पुलिस ने मॉनिटरिंग तेज की। पुलिस मुख्यालय स्तर पर जिलों के काम की सीधी साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है। एडीजी और डीजी स्तर के अधिकारी फील्ड अधिकारियों से सीधे संवाद कर रहे हैं। जिलों में तकनीकी रूप से सक्षम कार्मिकों की तैनाती भी की गई है।
-राजीव शर्मा, डीजीपी, राजस्थान