सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभार्थी जोड़कर करोड़ों रुपए का गबन करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करने वाले झालावाड़ के भवानीमंडी में तत्कालीन डीएसपी और वर्तमान में जयपुर कमिश्नरेट में नियुक्त प्रेम कुमार का केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक-2026 के लिए चयन किया है। उन्हें यह सम्मान उत्कृष्ट एवं उच्च कोटि के पेशेवर अनुसंधान के लिए मिला है। प्रेम कुमार के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन शटर डाउन के तहत पुलिस ने चार राज्यों में कार्रवाई कर सरकारी योजनाओं में सेंध लगाने वाले नेटवर्क का खुलासा किया था। एसपी अमित कुमार ने बताया कि अगस्त 2025 में मिली गोपनीय शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई थी। शिकायत में अकलेरा और मनोहरथाना क्षेत्र में अपात्र लाभार्थियों के जरिए सरकारी धन के गबन की जानकारी दी गई थी। जांच में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल नुकसान मुआवजा और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में फर्जीवाड़ा सामने आया। इसके बाद साइबर थाने में मामला दर्ज कर जांच डीएसपी प्रेम कुमार को सौंपी गई। मजबूत एसआईटी-साइबर टीम से मिली सफलता : प्रेम कुमार डीएसपी प्रेम कुमार ने "भास्कर' से बातचीत में बताया कि ऑपरेशन की सफलता में टीमवर्क, रणनीति और साइबर तकनीक की अहम भूमिका रही। एसपी अमित कुमार ने मजबूत एसआईटी गठित की और जांच के दौरान लगातार मार्गदर्शन दिया। मामला बड़ा और संवेदनशील था, इसलिए छोटी सी चूक भी जांच को प्रभावित कर सकती थी। टीम ने हर कदम सतर्कता से उठाया। उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों में सक्रिय आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी चुनौती थी, लेकिन वहां की पुलिस का सहयोग मिला। एसपी अमित कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों से समन्वय किया, जिससे कार्रवाई आसान हुई। ऑपरेशन में साइबर टीम की भूमिका सबसे अहम रही। तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और साइबर विश्लेषण से गिरोह के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद मिली। प्रेम कुमार ने इस उपलब्धि को किसी एक अधिकारी की नहीं, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। अब इस प्रकरण की जांच एसओजी कर रही है। मुख्य सचिव स्तर पर हुई समीक्षा 30 से ज्यादा ठिकानों पर दबिश दी, 51 आरोपी किए थे गिरफ्तार डीएसपी प्रेम कुमार के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने 22 अक्टूबर 25 को सुबह 6 बजे झालावाड़, दौसा, जयपुर और मध्यप्रदेश के राजगढ़ में 30 से अधिक ठिकानों पर दबिश दी। शुरुआती कार्रवाई में 30 आरोपियों को हिरासत में लिया गया। विस्तृत जांच के बाद राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश और दिल्ली से कुल 51 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनमें पीएम किसान योजना का स्टेट नोडल ऑपरेटर, फलोदी कलेक्ट्रेट का कर्मचारी, सीएमएचओ कार्यालय का स्टाफ और तहसील का ऑपरेटर भी शामिल था। कार्रवाई में 53 लाख रुपए नकद, 35 लैपटॉप-कंप्यूटर, 70 मोबाइल, 193 सिम, 430 एटीएम कार्ड, 207 बैंक पासबुक, 96 चेकबुक, 19 फिंगर स्कैनर और 30 वाहन जब्त किए गए। 11 हजार से अधिक संदिग्ध बैंक खातों का रिकॉर्ड और करीब 10 लाख लोगों का संवेदनशील डेटा भी मिला। ऑपरेशन के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। झालावाड़ पुलिस ने फर्जीवाड़े के तरीकों का प्रस्तुतिकरण दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों और संबंधित विभागों को डेटाबेस का सत्यापन, पोर्टल सुरक्षा मजबूत करने और धोखाधड़ी रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।